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कागजी आदेश! बिहार में शिशु मृत्यु दर रोकने में सरकारी मतभेद, नीतीश सरकार की तरफ से कोई ठोस कदम नहीं

सामना संवाददाता / पटना। बिहार में सुशासन बाबू की सरकार ने मतभेद होने के बावजूद एक और चौंकाने वाला कागजी आदेश जारी किया है। यह आदेश सरकारी अस्पतालों में प्रसव के बाद नवजातों की जांच से जुड़ा है। सरकार की मंशा प्राइवेट अस्पतालों की तरह शिशु मृत्यु दर रोकने को लेकर है, लेकिन जर्जर भवनों में संसाधनों की मार झेल रहे सरकारी अस्पतालों में यह कैसे संभव होगा इस पर ध्यान नहीं है। सरकार का दावा है कि स्वास्थ्य केंद्र पर दक्ष डॉक्टरों को तैनात कर नवजातों की जांच कराई जाएगी। जिससे शिशु मृत्यु दर पर पूरी तरह से काबू पाया जा सके।

सरकारी अस्पतालों में संक्रमण के बेड
सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों के साथ संसाधनों की भारी कमी है। बच्चों के डॉक्टरों की संख्या भी स्टेट में काफी कम है। प्रसव के दौरान महिला डॉक्टर की व्यवस्था हर संस्थान में नहीं हो पाती है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर तो डॉक्टर मिल जाते हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में ट्रेंड नर्स के जिम्मे ही यह काम होता है। इतना ही नहीं प्रसव के दौरान अगर ऑपरेशन की आवश्यकता होती है तो वह भी हर संस्थान में आसानी से नहीं मिल पाती है। प्रसव के लिए महिलाओं और उनके परिजनों को काफी भटकना पड़ता है। इस कारण से ही अधिकतर लोगों को डिलिवरी के दौरान निजी संस्थानों में भागना पड़ता है।
पटना में भी नहीं है पूरी व्यवस्था
राजधानी पटना में ही हर सरकारी अस्पताल पर ऐसी व्यवस्था नहीं है। कंकड़बाग और शास्त्री नगर में चल रहे स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रसव हो जाए, यह बड़ी बात है। बच्चों की जांच तो उससे भी मुश्किल काम है। पटना के गर्दनीबाग अस्पताल का भी कुछ ऐसा ही हाल है। यहां बेड से लेकर साफ-सफाई की बड़ी समस्या है। मरीजों को भर्ती करने के लिए तो व्यवस्था है लेकिन बेड टूटे पड़े हैं और उनमें संक्रमण का भी बड़ा खतरा है। ऐसे में सरकार के दावों की बात कहां से पूरी होगी यह बड़ा सवाल है।
संसाधन नहीं बढ़े, ट्रेनिंग के सहारे दावा
स्वास्थ्य विभाग अस्पतालों के जर्जर भवनों को सही नहीं करा पा रहा है और प्रशिक्षण के सहारे बड़े-बड़े दावे कर रहा है। जर्जर भवनों में चल रहे अस्पतालों में कई तरह की कमी है लेकिन दावा नवजातों के हर तरह की जांच का है। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत नवजात शिशुओं की व्यापक जांच प्रारंभ करने को लेकर दो चरणों में कार्यशाला चलाई जा रही है। इन कार्यक्रमों में प्रत्येक जिले से दो-दो चिकित्सा पदाधिकारी भाग ले रहे हैं।

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