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बालिकाओं के लिए बाल विवाह … किशोरावस्था में मातृत्व का बोझ!

• ठाणे के ३ साल के चिंताजनक आंकड़े
• शाहपुर और भिवंडी में सबसे अधिक बाल विवाह
सामना संवाददाता / ठाणे
मुख्यमंत्री के ठाणे जिले में बाल विवाह का विष तेजी से बढ़ रहा है। ठाणे जिला परिषद के स्वास्थ्य विभाग के प्राथमिक केंद्र में किशोर गर्भवती महिलाओं की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। एक ओर जहां ठाणे जिले में तीन वर्षों में १९ बाल विवाह सफलतापूर्वक रोके गए हैं, वहीं दूसरी ओर इसी अवधि के दौरान १४ से १७ वर्ष की आयु वर्ग में २३१ से अधिक किशोर माताओं की संख्या दर्ज की गई है, यह बाल विवाह रोकने में प्रशासन की विफलता को उजागर करता है, जिले के शाहपुर और भिवंडी इलाके में आंकड़े सर्वाधिक है, जो चिंताजनक है।
बता दें कि ठाणे शहर सहित ग्रामीण इलाकों में बाल विवाह का जहर तेजी से पैâल रहा है। ठाणे जिले के ग्रामीण भाग में अधिकतर आदिवासी लोग रहते हैं। आज भी यहां बाल विवाह की अशोभनीय प्रथा जारी है। सरकार के नए अध्यादेश के मुताबिक, अब ग्रामीण इलाकों में बाल विवाह रोकने के लिए ग्रामसेवक को निवारक अधिकारी नियुक्त किया गया है। साथ ही गांव में बाल विवाह नहीं होने देने के संकल्प को मंजूरी दिलाने की पहल करने की जिम्मेदारी भी उनकी होगी। इसके अलावा बाल कल्याण समिति को बालिकाओं की शिक्षा जारी रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। कर्तव्य में लापरवाही बरतने के मामले में बाल विवाह रोकथाम अधिकारी यानी ग्रामसेवक और जिला महिला बाल विकास अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। साथ ही, हेड मास्टर और प्रिंसिपल उन लड़कियों पर नजर रखने के लिए जिम्मेदार हैं जो पढ़ाई छोड़ देती हैं या अनुपस्थित रहती हैं। हालांकि, यह सच है कि आज ज्यादातर बाल विवाह ग्रामीण इलाकों में होते हैं।
शाहपुर में सर्वाधिक १७१ किशोर माताएं
ठाणे जिला स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में शाहपुर में १७१, भिवंडी में ५१, कल्याण में ३ और मुरबाड़ में पांच किशोर माताएं थीं। इससे यह स्पष्ट है कि बाल विवाह की संख्या बढ़ रही है और ग्रामीण क्षेत्रों में इस प्रणाली को और अधिक कुशलता से लागू करने की आवश्यकता है। शाहपुर तालुका में पाया गया है कि अधिकांश किशोर माताएं ठाणे जिले के ग्रामीण इलाकों में हैं। इस तालुका के डोलखंब, टेंभा, कसारा, टाकीपठार गांवों में स्थिति गंभीर है। कम उम्र में मातृत्व थोपने के कारण शाहपुर में शिशु मृत्यु दर और कुपोषण के आंकड़े भी अधिक हैं। हालांकि, शाहपुर में स्थिति चिंताजनक है, लेकिन प्रशासन इसे नजरअंदाज करता नजर आ रहा है। ठाणे जिले के महिला व बालविकास अधिकारी महेंद्र गायकवाड़ ने बताया कि आदिवासी क्षेत्रों में बाल विवाह अधिक प्रचलित है। सरकार के अध्यादेश के अनुसार, अब ग्रामसेवक को बाल विवाह रोकथाम अधिकारी घोषित किया गया है और उनकी सहायता के लिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और अन्य तंत्र प्रदान किए गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में बाल विवाह को रोकने के लिए जिला परिषद और ग्रामसेवकों की ग्राम विकास प्रणाली को और अधिक प्रभावी ढंग से काम करने की आवश्यकता है।

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