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बच्चे सुरक्षित नहीं, खतरे में महिलाएं पीएम के वाराणसी की कथा!

विनय कुमार पांडेय

वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है। प्रधानमंत्री और राज्य के मुख्यमंत्री अक्सर यहां का दौरा करते रहते हैं। बावजूद इसके, कानून व्यवस्था के मसले पर यहां कई लूप होल हैं। कमिश्नरेट सिस्टम लागू होने के बाद क्राइम का ग्राफ बढ़ा है।
बात करें आंकड़ों की तो १८ साल से कम उम्र के बच्चे-बच्चियां सुरक्षित नहीं हैं। साल २०२२ में ९१ बच्चों-बच्चियों के साथ यौन हिंसा से संबंधित मुकदमे कमिश्नरेट के थानों में दर्ज हुए। यानी हर चार दिन बाद एक नाबालिग बच्चा या बच्ची यौन हिंसा का शिकार हुआ। इस बीच बीते साल आठ बच्चों की हत्या की गई। नेशनल क्राइम रिकॉड्र्स ब्यूरो (एनसीआरबी) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, वाराणसी में साल २०२२ में १८ वर्ष से कम आयु के ४६ बच्चों के साथ दुष्कर्म हुआ। ४१ नाबालिग बच्चियों के साथ छेड़खानी हुई। इसके अलावा चार नाबालिग के लैंगिक उत्पीड़न के मामले दर्ज किए गए, वहीं ८६ नाबालिग बच्चों के अपहरण के मुकदमे दर्ज हुए। आईटी एक्ट के तहत बच्चों से जुड़े ३१ मामले दर्ज किए गए। इस तरह वाराणसी कमिश्नरेट के थानों में वर्ष २०२२ में बच्चों-बच्चियों से संबंधित भारतीय दंड संहिता और विशेष व स्थानीय कानून (एसएलएल) के तहत २४१ मुकदमे दर्ज किए गए।
वाराणसी में रोजाना विवाहिताएं घरेलू हिंसा का शिकार होती हैं। एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष २०२२ में वाराणसी की ४८५ महिलाओं ने अपने पति और ससुराल वालों के खिलाफ मुकदमे दर्ज कराए। साल भर में दहेज हत्या के २५ मुकदमे दर्ज किए गए और नौ महिलाओं को आत्महत्या के लिए उकसाया गया। २०८ महिलाओं का अपहरण हुआ। इनमें १२८ महिलाओं का अपहरण शादी के उद्देश्य से किया गया।
वर्ष २०२२ में वाराणसी में भारतीय दंड संहिता और विशेष व स्थानीय कानून (एसएलएल) के तहत महिलाओं से संबंधित १०११ मुकदमे दर्ज किए गए थे। वर्ष २०२२ में महिलाओं के साथ दुष्कर्म के ६१ मुकदमे और दुष्कर्म के प्रयास के आरोप में एक मुकदमा दर्ज किया गया। इस तरह से औसतन हर छठे दिन एक महिला से दुष्कर्म के आरोप में मुकदमा दर्ज हुआ। इसी तरह छेड़खानी के ११३ मामले दर्ज हुए। यानी हर तीन दिन बाद एक महिला से छेड़खानी का मामला दर्ज किया गया। बनारस में साल २०२२ में हर एक दिन बाद सड़क हादसे में मौत हुई। एक साल में २७५ लोगों की जान सड़क हादसे में गई, वहीं प्रत्येक आठ दिन बाद एक व्यक्ति की हत्या की गई। यानी हत्या के ४५ और हत्या के प्रयास के १४ मुकदमे दर्ज किए गए। इस तरह भारतीय दंड संहिता के तहत ८,०५२ प्रकरण दर्ज किए गए।
युवतियों और महिलाओं के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम भी सुरक्षित नहीं है। पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम में यौन उत्पीड़न के ३८ मामले दर्ज किए गए थे, वहीं अन्य जगहों पर महिलाओं से यौन उत्पीड़न के ४० मामले दर्ज किए गए थे। महिलाओं की ताक-झांक के आरोप में आठ, उनका पीछा करने के आरोप में नौ और उन्हें डराने-धमकाने के इरादे से उन पर हमला या आपराधिक बल के प्रयोग के आरोप में १७ मामले दर्ज हैं।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और समीक्षक हैं।)

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