मुख्यपृष्ठनए समाचार‘मिंधे’ गुट मां-बाप को भुलाने वाली औलाद -सुषमा अंधारे

‘मिंधे’ गुट मां-बाप को भुलाने वाली औलाद -सुषमा अंधारे

सामना संवाददाता / मुंबई
यह जो शिवसेना से अलग होकर ४० विधायक भाजपा के साथ गए हैं, ये लोग मां-बाप को भूलनेवाली गद्दार औलाद हैं। ये लोग हिंदुत्व क्या बताएंगे, बीकेसी में इवेंट करनेवाले, जिनका हिंदुत्व ‘ईडी’ कार्यालय में जाकर जागृत होता है। ये बातें शिवसेना की पदाधिकारी सुषमा अंधारे ने कहीं। वे शिवाजी पार्क में आयोजित शिवसेना के दशहरा सम्मेलन को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि इन गद्दारों को आगामी चुनाव क्षेत्रों के निष्ठावान शिवसैनिक जवाब देंगे। किरण पावस्कर, अब्दुल सत्तार, तानाजी सावंत जैसे कई नेताओं की खिल्ली उड़ाते हुए उन्होंने कहा कि जो लोग फायदे के लिए दूसरों के सामने घुटने टेके खड़े थे, वे लोग हमें बताएंगे कि हिंदुत्व क्या है?
उन्होंने नारायण राणे का नाम लेते हुए कहा कि हिंदुत्व सिखानेवाले नारायण राणे भूल गए, जब सोनिया गांधी के पैरों पर १० वर्षों तक लोट कर बिताया। इसके बदले विधायक, मंत्री और क्या-क्या सुख लिया। रामदास कदम की खिंचाई करते हुए उन्होंने कहा कि एनसीपी में जाने का दबाव बनाकर शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे से कई बार मंत्री पद लिया। अब हिंदुत्व के लिए शिवसेना छोड़ दी है।
उन्होंने आगे कहा कि उद्धव ठाकरे ने हिंदुत्व छोड़ दिया है? क्या धर्म बदला है? नहीं, उन्होंने सिर्फ चिल्लर नूपुर शर्मा की तरह चिल्लर वादी बयान नहीं दिया है। मैं पूछना चाहती हूं कि हिंदुत्व के कौन से वेद, पुराण, ग्रंथ में लिखा है कि कट्टर हिंदुत्व के लिए अन्य धर्मों के प्रति द्वेष करना जरूरी है। ‘मिंधे’ गुट के लोग, हिंदू को तो तुमने कलंकित किया है। तुमने कलंक लगाया है। हिंदू धर्म में परिवार के लोग कष्ट के समय साथ नहीं छोड़ते हैं। लेकिन तुमने साथ छोड़कर हिंदू धर्म को कलंकित किया है।
उन्होंने कहा कि आज उद्धव ठाकरे के साथ जनजाति, पिछड़ा वर्ग, दलित वर्ग, मुस्लिम वर्ग, हर समाज के लोग खड़े हैं और यही देखकर ‘मिंधे’ गुट के लोग नौटंकी कर रहे हैं। अब नई नौटंकी कर रहे हैं कि शिवसेना को हम बचाने निकले हैं तो मैं उनसे पूछती हूं कि जब शिवसेना को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने खत्म करने की बात की तब तुम लोग चुपचाप सुन वैâसे रहे थे? तुम्हारा हिंदुत्व सिर्फ ईडी कार्यालय में ही जागृत होनेवाला हिंदुत्व है। शिवसेना एक विचार है, वह कभी खत्म होनेवाली नहीं है।

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