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मोबाइल की लत से भंग हो रही है बच्चों की एकाग्रता …फोन पर अधिक समय बिताते हैं ४७ फीसदी बच्चे सर्वे में सामने आई जानकारी

धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई
मोबाइल की लत बड़ों के साथ ही बच्चों के दिमाग की एकाग्रता को भंग करने का काम कर रही है। इसका असर बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा है। एक हालिया सर्वेक्षण में पाया गया कि १२ साल से कम उम्र के कम से कम ४२ प्रतिशत बच्चे दिन में दो से चार घंटे तक अपने मोबाइल फोन से चिपके रहते हैं। इस उम्र के बच्चे अपने दैनिक समय का ४७ प्रतिशत समय मोबाइल फोन देखने में बिताते हैं।
यह सर्वेक्षण वाईफाई के उपयोग की निगरानी करनेवाले उपकरण बनानेवाली कंपनी हैप्पीनेट्ज द्वारा किया गया। सर्वेक्षण के अनुसार, इस सर्वे में १,५०० लोगों ने हिस्सा लिया। इसमें पाया गया कि १२ साल और उससे अधिक उम्र के ६९ प्रतिशत बच्चों के पास अपना मोबाइल अथवा टैबलेट है, जिसके जरिए वे बिना किसी रुकावट के कुछ भी देख सकते हैं। सर्वेक्षण में यह भी पाया गया कि ७४ प्रतिशत बच्चे यूट्यूब देखते हैं, जबकि १२ साल और उससे अधिक उम्र के ६१ प्रतिशत बच्चे गेमिंग की ओर आकर्षित हैं। इस मनोरंजन के कारण इन बच्चों का स्क्रीन टाइम बढ़ रहा है।
बदल रही नई पीढ़ी
अब नई पीढ़ी बदल रही है। महिलाओं और लड़कियों में भी मानसिक बदलाव आया है। लंबे समय से घर में रहने और बात-बात पर झगड़ा करने से बड़ी संख्या में महिलाएं और लड़कियां मानसिक बीमार हो गई हैं। दूसरी ओर नौकरी छूटने और काम नहीं मिलने के कारण पुरुष भी डिप्रेशन में आए हैं।
माता-पिता खुद में करें परिवर्तन
मनोचिकित्सक डॉ. सुवर्णा माने के मुताबिक, इसका इलाज डॉक्टर से कहीं अधिक माता-पिता के हाथों में है। बच्चों को ठीक करने के लिए माता-पिता को खुद भी अपने अंदर कुछ परिवर्तन करने चाहिए। सबसे पहले तो बच्चों से बात करना शुरू करें। अपनी तरफ से पूरी तरह सकारात्मक रहें। बच्चों को खेलने के लिए कहने की बजाय खुद भी उसके साथ खेलें। खुद उनके साथ बैठकर ड्राइंग बनाएं। बच्चों को पूरा समय दें और धीरे-धीरे उन्हें ठीक करिए। इन चीजों को करने के बाद बच्चा धीरे-धीरे मोबाइल से दूर होकर बाकी चीजों में ध्यान लगाना शुरू कर देगा।

महामारी से बच्चों में मोबाइल की बढ़ी लत
कोरोना महामारी के बाद से बच्चे मोबाइल के एडिक्ट हो रहे हैं। मुंबई के अस्पतालों में मानसिक रोग विभाग में रोजाना कई बच्चे ऐसे आते हैं, जो मोबाइल एडिक्ट हैं। अब बच्चे फिजिकली खेलने-कूदने की बजाय सिर्फ ऑनलाइन गेम खेलना ही पसंद करते हैं। अध्ययन में बताया गया है कि महामारी के दौरान बच्चों के बीच मोबाइल के उपयोग में वृद्धि हुई है।

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