मुख्यपृष्ठटॉप समाचारएलओसी पर चीन की नजर!...कब्जा करने की रच रहा है साजिशें

एलओसी पर चीन की नजर!…कब्जा करने की रच रहा है साजिशें

सामना संवाददाता / नई दिल्ली । केंद्र की मोदी सरकार देश में विरोधी दलों को चुनावी राजनीति में शिकस्त देने की साजिश रचने में व्यस्त है, जबकि दूसरी ओर पड़ोस में बैठे चीन और पाकिस्तान जैसे बैरी देश हिंदुस्थान को बड़ा झटका देने की तैयारी में लगे हैं। रूस और यूक्रेन की जंग का लाभ उठाने का मंसूबा चीन खासतौर पर बनाने लगा है। चीन अब हिंदुस्थान के खिलाफ साजिशों के जाल बुन रहा है। विशेषज्ञों का ऐसा मानना है कि आनेवाले दिनों में चीन एलओसी व आस-पास के विवादित क्षेत्रों पर कब्जा जमाने का एक बार फिर प्रयास कर सकता है, क्योंकि चीनी रणनीतिकारों को ऐसा विश्वास हो गया है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा के आस-पास कब्जा करने की नीयत से चीनी सेना पूर्वी लद्दाख जैसी कोई हरकत करती है तो दुनिया का कोई देश खुलकर हिंदुस्थान की मदद करने के लिए सामने नहीं आएगा। चीन के इस आत्मविश्वास के कारण चार राज्यों में चुनाव जीतकर विश्व विजेता जैसा बर्ताव करनेवाली केंद्र की मोदी सरकार की आत्ममुग्धता देश के लिए घातक साबित हो सकती है।
हाल ही में चीन के उपविदेश मंत्री ली यूचेंग ने अप्रत्यक्ष धमकी देते हुए कहा था, ‘यूक्रेन संकट हमें आईना दिखाता है कि हम एशिया और हिंद-प्रशांत क्षेत्र के हालात का आकलन करें। धारा के विपरीत जाकर अमेरिका की हिंद-प्रशांत रणनीति का पालन करना समस्या को और भड़काएगा। अगर बिना रोकटोक के इसे होने दिया गया तो बहुत गंभीर परिणाम होंगे।’ यूक्रेन का उदाहरण देकर चीन का इशारा साफ तौर पर हिंदुस्थान की ओर है। चीन के उपविदेश मंत्री ली यूचेंग ने धमकी देते हुए कहा है कि अमेरिका की हिंद प्रशांत नीति और क्वॉड जैसे समूहों का बनना उसी तरह से खतरनाक है, जैसे यूरोप में नाटो का विस्तार रहा है। उन्होंने यह भी कह दिया कि अमेरिका की नीति एशिया को नरक में ढकेल सकती है।
चीन ने क्वॉड की आलोचना ऐसे समय में की है, जब इस समूह की कुछ दिन पहले हुई बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हुए थे। क्वॉड समूह में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया के साथ जापान और हिंदुस्थान भी शामिल हुआ था। यह समूह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के प्रभाव को कड़ी चुनौती दे रहा है। इसका मकसद समुद्री रास्तों पर व्यापार में आसानी के साथ शक्ति संतुलन साधने पर भी है। अमेरिका हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन को काउंटर करने के लिए हिंदुस्थान की बड़ी भूमिका चाहता है। यही वजह है कि जैसे ही मौका मिला, चीन ने हिंदुस्थान को संदेश देने की कोशिश की है। उसका मानना है कि यदि इस हालात में चीनी सेना कोई हरकत करती है तो हिंदुस्थान कूटनीतिक और सैन्य दोनों तरीके से एकदम अकेला रहेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका इस समय रूस की तर्ज पर किसी के साथ फौजी टकराव में उलझना नहीं चाहता। अमेरिका ही नहीं, नाटो के बाकी सदस्य देश भी सीधे तौर पर जंग में उलझने से कतरा रहे हैं।

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