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बफर जोन में चीन की दखलंदाजी!

सुरेश एस डुग्गर / जम्मू

समझौतों के बावजूद चीनी सेना लद्दाख के मोर्चे पर उन बफर जोनों में लगातार ड्रोन उड़ाकर भारतीय सेना को परेशान किए हुए है। जहां से दोनों पक्षों ने कुछ अरसा पहले अपने जवानों को रिट्रीट किया था। भारतीय पक्ष द्वारा इसे उकसाने वाली कार्रवाई भी करार दिया है। लद्दाख के मोर्चे से मिलनेवाली खबरें कहती हैं कि सेनाधिकारियों ने अपनी चिंताओं से सेना मुख्यालय को अवगत करवाते हुए कहा है कि इससे निपटने के उपाय तत्काल किए जाने चाहिए क्योंकि चीनी सेना की ड्रोन उड़ानें उनके सामारिक महत्व के ठिकानों को बार-बार बदलने पर मजबूर कर रही हैं।
दरअसल, लद्दाख सीमा पर बफर जोन उस समय बनाए गए, जब मई २०२० में चीनी सेना लद्दाख के भीतर कई किमी तक घुस आई थी और बाद में हुए समझौतों के तहत भारतीय सेना को ही अपने क्षेत्रों से पीछे हटना पड़ा था। इन समझौतों में भारतीय सेना को अपने ही कई इलाकों में गश्त करने पर भी पाबंदी लगा दी गई थी।
हालांकि, सैन्य सूत्रों ने कहा कि चीन के हालिया कदम का मुकाबला करने के लिए भारतीय सेना भी चीनी सेना की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए अपने ड्रोन तैनात कर रही है। रक्षा सूत्रों के मुताबिक, सैटेलाइट इमेजरी से भी संकेत मिलता है कि चीनी सेना ब़ड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे के विस्तार और अपने सैनिकों के लिए आवास के निर्माण के अलावा वास्तविक नियंत्रण रेखा अर्थात एलएसी पर अपने ड्रोन के बेड़े का उपयोग कर रही है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने चीनी सेना द्वारा बफर जोन पर ड्रोन के इस्तेमाल पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
पिछले साल `लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद’ के एक निर्वाचित प्रतिनिधि ने बताया था कि वैâसे बफर जोन के निर्माण ने स्थानीय लोगों को अपने पशुओं के लिए चरागाहों तक

दोनों पक्ष फरवरी २०२१ में पैंगांग झील के उत्तरी और दक्षिणी तट से अगस्त २०२१ में गोगरा में पेट्रोलिंग प्वाइंट १७ से और सितंबर २०२२ में हाट स्प्रिंग्स में पेट्रोलिंग प्वाइंट १५ से पीछे हट गए थे। इससे पहले वे गलवान घाटी से हट गए थे। २०२० में एक झड़प के बाद, जिसमें २० भारतीय सैनिक और कम से कम चार चीनी सैनिक मारे गए थे।

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