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चीनी गेंदे ने बिगाड़ी देशी फूलों की ‘ताजगी’! गणेश चतुर्थी के दिन ही हुआ फूल विक्रेताओं को ८-१० करोड़ का नुकसान

राजन पारकर / मुंबई
चीनी उत्पादों ने फिर एक बार स्वदेशी सामानों की बिक्री पर विपरीत परिणाम डाला है। मुंबई के बाजारों में चीन उत्पादित प्लास्टिक के गेंदों के कृत्रिम पूâलों ने देशी फूलों की ‘ताजगी’ को फीका कर दिया है। गणेश चतुर्थी यानी केवल एक दिन में ही फूल विक्रेताओं को चीनी फूलों से ८-१० करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।‌
चीन‌ के कृत्रिम फूल बाजार में आए हैं, इसका असर प्राकृतिक फूलों की खरीदारी पर देखने को मिल रहा है। फूल विक्रेताओं का कहना है कि किसानों द्वारा खेतों में उगाए गए फूलों की कीमत कम है लेकिन ग्राहकों ने कुछ हद तक उन्हें खरीदने से मुंह मोड़ लिया है। ग्राहक प्लास्टिक के कृत्रिम फूल पसंद कर रहे हैं। विक्रेताओं का कहना है कि इससे हमारे कारोबार पर असर पड़ रहा है। कृत्रिम फूल विक्रेताओं के अनुसार दादर बाजार में बिकने वाले चीनी कृत्रिम गेंदे की कीमत ६०० से ७०० रुपए प्रति किलो है। लेकिन दूसरी ओर प्राकृतिक गेंदे के फूलों की कीमत ६० रुपए प्रति किलो है। फूल विक्रेताओं का कहना है कि ग्राहक प्राकृतिक फूलों को बड़ी मात्रा में नहीं खरीद रहे हैं। विक्रेताओं के साथ ही किसान भी प्रभावित हो रहे हैं।
कृत्रिम गेंदे के फूलों का उपयोग मुख्य रूप से सजावट और अन्य कार्यों के लिए किया जाता है। पिछले कुछ वर्षों से इन फूलों की मांग काफी बढ़ गई है। दादर फूल मार्केट के विक्रेताओं से पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि प्लास्टिक के फूल लंबे समय तक टिके रहते हैं इसलिए लोग प्राकृतिक फूल ज्यादा नहीं खरीदते। प्लास्टिक के फूल हमारे व्यापार को काफी हद तक प्रभावित कर रहे हैं। दादर फूल मार्केट में प्रति माह ५० करोड़ से अधिक का कारोबार होता है लेकिन गणेशोत्सव में आठ से दस करोड़ रुपए का नुकसान होने का अनुमान है।

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