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सिटीजन रिपोर्टर : सौंदर्यीकरण के बाद बढ़ा … रास्ते पर चलने का रिस्क!

दक्षिण मुंबई के मालबार हिल इलाके में स्थित वालकेश्वर बाणगंगा को सुंदर बनाने के लिए उसका सौंदर्यीकरण किया गया है, लेकिन अब इस सौंदर्यीकरण का एक दूसरा पहलू सामने आया है, जो बेहद हैरान करनेवाला है। रास्ता बनने के बाद इस पर चलने का रिस्क भी बढ़ गया है। यहां के लोग बताते हैं कि यहां रास्तों को छोटे-छोटे पत्थरों से बनाया गया है। इस रास्ते पर इतना ज्यादा स्लोप है कि लोग असंतुलित होकर गिर जाते हैं।
पथरीले और
स्लोपदार हैं रास्ते 
‘दोपहर का सामना’ के सिटीजन रिपोर्टर राजेश बी. गुप्ता ने यहां की हकीकत को लोगों के माध्यम से बयां किया है। राजेश ने बताया कि स्थानीय लोगों में प्रशासन की इस लापरवाही को लेकर काफी गुस्सा है। लोगों ने अपनी पूरी समस्या से राजेश को अवगत कराया। रहिवासियों का कहना है कि रास्ता छोटे पत्थरों से बनाया गया है, जो काफी पथरीले और स्लोपदार हैं, जिससे यहां के लोग जल्दबाजी में गिर जाते हैं। लोगों का कहना है कि सबसे अधिक परेशानी रात के समय होते है जब रास्ते पर अंधेरा होता है। तब आने-जाने में और भी परेशानी होती है। कई बात तो लोग गिर जाते हैं और जख्मी हो जाते हैं। बारिश के समय तो यह परेशानी और भी बढ़ जाती है।
 स्थिति बद से बदतर
स्थानीय लोगों ने यह भी बताया कि उन्होंने महानगरपालिका के ‘ड’ विभाग के अधिकारी चिराग दवे को इस समस्या से अवगत भी कराया है, लेकिन इसके बावजूद भी इस समस्या पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। राजेश ने भी जांच-पड़ताल में पाया कि स्थानीय लोग सही कह रहे हैं। वास्तव में वहां की स्थिति बद से बदतर है।

काम में बरती लापरवाही 
इस रास्ते के नवीनीकरण के बाद ड्रैनेज पर लगी लोहे की जालियों के ढक्कन को नया लगाने की बजाय पुराना ही लगा दिया गया है, वहीं रास्ते के दूसरे छोर पर गटर के ढक्कन को ठीक ढंग से बैठाया नहीं गया। जिसकी वजह से लोगों को आते-जाते समय ठोकर लगती रहती है। इतना ही नहीं कुछ ढक्कनों के टूटने के बाद भी उसे बदला नहीं गया है, बल्कि उसी टूटे-फूटे ढक्कनों को बैठा दिया गया है। मनपा की इस लापरवाही की वजह से किसी दिन कोई हादसा भी हो सकता है।

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