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सिटीजन रिपोर्टर : उल्हासनगर के लिए बिजली विभाग बना सिरदर्द! …पर्यावरण के लिए भी विनाशकारी

उल्हासनगर शहर का बिजली विभाग एक तरफ जहां लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है, वहीं दूसरी ओर पर्यावरण के लिए भी नुकसानदेह साबित हो रहा है। उल्हासनगर का बिजली विभाग भूमिगत बिजली लाइन कब करेगा? ऐसा सवाल खड़ा हो रहा है। ‘दोपहर का सामना’ के सिटीजन रिपोर्टर जगनसिंह राजपूत ने बिजली विभाग की इस लापरवाही से अवगत कराते हुए बताया है कि उल्हासनगर के बिजली विभाग की व्यवस्था राम भरोसे है। उल्हासनगर में खुले बिजली के तारों के कारण पर्यावरण व जानमाल की हानि होती रहती है। उल्हासनगर में खुले बिजली के तारों के कारण उसके पास के पेड़ों की हर वर्ष छंटाई की जाती है। इससे पर्यावरण को नुकसान हो रहा है। बिजली के खुले तार तेज हवा और मानसून के चलते टूटते रहते हैं। कई शहरों में बिजली के तारों को भूमिगत करने की योजना शुरू है। इस मामले में उल्हासनगर काफी पीछे है। खुले असुरक्षित तारों के चलते कई लोगों की जीव हानि हो चुकी है। बिजली के खुले तारों के कारण बिजली चोरी के मामलों में भी उल्हासनगर अव्वल है। बिजली चोरी को लेकर उल्हासनगर के पुलिस स्टेशन में सर्वाधिक मामले दर्ज हैं।
बिजली चोरी के लिए खुले तार वरदान साबित हो रहे हैं। उल्हासनगर में बिजली के खंभे पर इतने कनेक्शन दिए जाते हैं कि उसे देखकर ऐसा लगता है मानो मकड़ी का कोई जाल हो। उल्हासनगर में बिजली विभाग की अनदेखी का ही नतीजा है कि भूमाफिया लोग बिजली के पोल तक को हड़प ले रहे हैं। पोल को मकान के अंदर लिए जाने से बिजली की आपूर्ति में खराबी आने पर उसकी मरम्मत में काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है। ठाणे शहर में बिजली भूमिगत हो गई है, परंतु उल्हासनगर में ऐसा क्यों नहीं किया जा रहा है? उल्हासनगर में बिजली विभाग में सुधार न होता देख राजपूत का कहना है कि इसका कारण राजनीतिक लोगों की उदासीनता है। जगनसिंह राजपूत ने बिजली विभाग पर आरोप लगाया है कि विभाग में मनमाना कारोबार शुरू है। सूचना के अधिकार के अंतर्गत जानकारी नहीं दी जाती है। जब मर्जी बिल बढ़ा दिया जाता है। सूचना के अधिकार के तहत नोडल अधिकारी हर विभाग में रखना अनिवार्य है, जो उल्हासनगर बिजली विभाग में नहीं है। यदि मीटर में खराबी आ जाए तो तीन माह में अनिवार्य रूप से बदलना चाहिए, जो सालों तक बदली नहीं किया जा रहा है। मीटर घटिया होने के चलते वह कभी भी खराब हो जाता है। निकाले गए बिजली के पोल सालों तक जगह पर ही पड़े रहते हैं। दूर के ठेकेदारों को नियुक्त किए जाने के कारण मरम्मत के काम में दिक्कत आती है। बिजली विभाग केवल उपभोक्ता से बिल का भुगतान चाहता है, परंतु अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं करता है। आज भी ग्रामीण भागों की तरह बिजली की आंख-मिचौली चल रही है। बिजली विभाग की गलती होने पर भी लाइट काट दी जाती है। बिल भरने के बाद भी कनेक्शन जोड़ने में कई दिन लग जाते हैं। बीस साल पुराना मामला बताकर न्यायालय में केस किया जाता है।

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