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सिटीजन रिपोर्टर : दरारों से लग रहा डर, ठाणे में झूलता `मौत’ का पुल!

मुंबई हो या ठाणे यहां के लिए पुल हादसों की खबरें नई नहीं हैं। यहां के ज्यादातर फुटओवर ब्रिज पुराने और जर्जर अवस्था में हैं। ये लोगों का भार उठाते-उठाते कब धाराशाई हो जाएं कुछ कहा नहीं जा सकता। लेकिन न तो सरकार पर इसका असर दिखता है और न ही स्थानीय प्रशासन पर। हादसा हो जाने के बाद मुआवजे की बातें, पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना के दो शब्द और भविष्य में ऐसे हादसे रोकने की महज कागजी योजनाओं के अलावा कुछ नहीं होता। आए दिन हो रहे हादसों के बाद भी सरकार के कानों में जूं तक नहीं रेंगती। `मौत’ के पुलों ने अब तक न जानें कितनी जिंदगियां लील ली हैं। इसके बावजूद प्रशासन कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है। हां, सरकार अगर कुछ करती है तो वह है खेद जताना। ठाणे का साकेत पुल भी इन दिनों सुर्खियां बटोर रहा है। नासिक, मुंबई और मुंब्रा को जोड़ता साकेत पुल इन दिनों चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि, कहा जा रहा है कि पुल का काम जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा। बता दें कि लोगों की इस समस्या को उजागर किया है `दोपहर का सामना’ के सिटीजन रिपोर्टर अनिल शर्मा ने। उनका कहना है कि इस बाबत शिकायत की गई है लेकिन अभी तक कोई मरम्मत कार्य शुरू नहीं हुआ है। ज्ञात हो कि ये पुल नासिक से ठाणे, मुंबई और मुंब्रा को जोड़ता है। इसकी मरम्मत कई बार सरकार द्वारा की गई पर सही रख-रखाव न होने के कारण ये बड़े हादसे को निमंत्रण दे सकता है। इस पुल से लगातार गाड़ियों के चलने से जाम बना रहता है। कभी-कभी तो इस पुल पर गाड़ियां खड़ी हो जाती हैं। वाहन चालकों को इस हिलते पुल से डर का एहसास बना रहता है। ये पुल राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अंतर्गत आता है। ये दो पुल साकेत के लिए है, इनमें से पहला पुल १९८६ में और दूसरा १९९९ में बनाया गया है। इस पुल के हिलने का कारण बेअरिंग के कमजोर और टूटे होने को माना गया है।
हो सकती है बड़ी दुर्घटना
इंजीनियर का मानना है कि  इस बेअरिंग को लगभग १५ से २० साल के अंतराल में एक बार  जरूर बदलना चाहिए। अगर वक्त पर ये नहीं बदले गए तो बड़ी दुर्घटना  हो सकती है। अनिल शर्मा के अनुसार, प्रशासन के रोड और ब्रिज के मेंटेनेंस विभाग को इस बाबत जांच करते रहना चाहिए और आपातकालीन परिस्थिति में पुल को बंद कर इसकी तुरंत रिपेयरिंग शुरू कर देनी चाहिए।

हादसों का इंतजार क्यों?
कुछ पुराने पुल हादसे आज भी रोंगटे खड़े कर देते हैं। अंधेरी का गोखले ब्रिज हो या एलफिंस्टन रोड ओवरब्रिज हादसा, जिसमें २२ लोगों की मौत हो गई थी। दरअसल, ये आम धारणा है कि मुंबई में बारिश के मौसम में ही ऐसे हादसे होते हैं। इसलिए वहां बारिश से पहले मरम्मत का काम किया जाता है। लेकिन वह भी आधा-अधूरा। बीएमसी कहने को कई एहतियाती कदम भी उठाती है, लेकिन पुराने पुलों को लेकर योजनाएं कागजों से बाहर नहीं निकलतीं। हालांकि, अंधेरी के गोखले ब्रिज हादसे के बाद कहा गया था कि मुंबई के करीब ४४५ ओवरब्रिज का निरीक्षण किया जा रहा है। यह भी कहा गया कि इनमें से ६ ओवरब्रिज को बंद करके फिर से बनाया जाएगा।

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