मुख्यपृष्ठनए समाचारसिटीजन रिपोर्टर : उल्हास नदी को जलकुंभी रहित करने में महाराष्ट्र प्रदूषण...

सिटीजन रिपोर्टर : उल्हास नदी को जलकुंभी रहित करने में महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड नाकामयाब!

कल्याण
कल्याण तहसील के ग्रामीण भाग से बहनेवाली उल्हास नदी मुंबई, नई मुंबई, ठाणे, उल्हासनगर, कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका के साथ ही शहर व ग्रामीण भागों की प्यास बुझाती है। इसके बावजूद स्थानीय प्रशासन, पुलिस और महाराष्ट्र प्रदूषण मंडल के अधिकारियों की लापरवाही के चलते बढ़ती गंदगी ने नदी में जलकुंभी को जन्म दिया है। ‘जल ही जीवन है’ इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर महाराष्ट्र सरकार की अनदेखी के कारण पानी दूषित होता जा रहा है। बढ़ते प्रदूषण के कारण उल्टी, जुलाब, पीलिया जैसी तमाम बीमारियां बढ़ रही हैं। ‘दोपहर का सामना’ के सिटीजन रिपोर्टर जगन्नाथ निपुरते ने जानकारी दी है कि वैâसे उल्हास नदी की सफाई में महाराष्ट्र सरकार फेल हो रही है।
जगन्नाथ निपुरते ने बताया कि कल्याण तहसील से उल्हास नदी, बारवी नदी, कालू नदी और भातसा नदी बारहों महीने बहनेवाली नदियां हैं। ये नदियां सैकड़ों गांव, नगरपालिका, महानगरपालिका तथा शहर में रहनेवाले लाखों लोगों की प्यास बुझाती हैं। इसके बावजूद लोग नदी के महत्व को न समझते हुए नदी को दूषित कर रहे हैं। महाराष्ट्र सरकार भी प्रदूषण रोकने में फेल साबित हो रही है। बदलापुर, कर्जत, अंबरनाथ, कल्याण ग्रामीण का फार्महाउस, इमारतों का पानी, केमिकल रसायन, तबेला, शौचालय का दूषित पानी बिना प्रक्रिया के उल्हास नदी में छोड़ा जाता है।
जलकुंभी जैसे प्रदूषण के विरोध में उल्हास नदी बचाव कृति समिति ने जोरदार विरोध किया था, जिसके बाद जलकुंभी निकालने का प्रयास किया गया था। पानी में प्रदूषण को खत्म करने के लिए हजारों किस्म की मछलियां छोड़ी गई थीं। नाव के सहारे जलकुंभी को निकाला गया था और दवा का छिड़काव भी किया गया था। कुछ समय तक जलकुंभी नहीं दिखाई दी, लेकिन जनवरी महीने से उल्हास नदी में फिर से जलकुंभी का पैâलाव होता दिखाई दे रहा है। रायता, कांबा, वरप, मोहना, म्हारल गांव के पास नदी में पुन: जलकुंभी का प्रकोप बढ़ता दिखाई दे रहा है।
बता दें कि उल्हास नदी में दूषित पानी छोड़ने पर रोक न पाने के मामले में राज्य सरकार के प्रदूषण विभाग को मुंबई न्यायालय ने फटकार भी लगाई है। इसके बावजूद सारे प्रयास फेल साबित हुए। स्थानीय लोग भी नदी के महत्व को नहीं समझते हैं। वे लोग नदी में गंदगी बहाने से बाज नहीं आते और जब तक ऐसा नहीं होता, तब तक नदी की गरिमा और उसकी स्वच्छता को बरकरार रख पाना कठिन ही नहीं, बल्कि नामुमकिन भी है।

अन्य समाचार