मुख्यपृष्ठनमस्ते सामनासिटीजन रिपोर्टर: भ्रष्टाचार में आकंठ डूबा  सार्वजनिक बांधकाम विभाग

सिटीजन रिपोर्टर: भ्रष्टाचार में आकंठ डूबा  सार्वजनिक बांधकाम विभाग

उल्हासनगर मनपा का सार्वजनिक बांधकाम विभाग इन दिनों सबसे भ्रष्ट और लूटपाट विभाग साबित हो रहा है, जिसका जीता जागता प्रमाण है कि शहर की अंडर ग्राउंड नालियों में लगे कई ढक्कन गायब हैं। उल्हासनगर मनपा के सामने क्रिस्टी क्लासेस है, जहां प्रतिदिन सैकड़ों बच्चे पढ़ने के लिए आते हैं। क्लासेस के सामने मुख्य मार्ग पर अंडर ग्राउंड नाली का ढक्कन गायब है, जिसके कारण किसी भी समय छात्र नाली में गिरकर जख्मी हो सकते हैं। अगर किसी को चोट लगती है तो उसका जिम्मेदार कौन होगा? ‘दोपहर का सामना’ के सिटीजन रिपोर्टर जुगनू यादव ने उल्हासनगर के सार्वजनिक विभाग के गैर जिम्मेदाराना रवैये को विस्तार पूर्वक बयान किया है।

काम का घटिया स्तर 

जुगनू यादव ने बताया कि शहर की जनता अपनी मेहनत की कमाई का हिस्सा टैक्स के रूप में शहर के विकास के लिए देती है। इसके बावजूद स्थिति यह है कि ठेकेदार मनपा के अधिकारियों को रिश्वत देकर घटिया से घटिया काम करते हैं, जिसका नतीजा यह निकलता है कि सार्वजनिक बांधकाम की देखरेख में किया गया कार्य कुछ ही महीने में बेकार हो जाता है। अधिकारी उस घटिया काम की जांच तक करना जरूरी नहीं समझते हैं। ऐसे घटिया कार्य को सोशल मीडिया, समाचार पत्रों द्वारा प्रकाश में लाया जाता है, लेकिन उसकी जांच कराने की हिम्मत मुकादम से आयुक्त तक नहीं जुटा पाते हैं। आखिर ऐसी क्या चीज है जो उनके ऊपर भ्रष्टा

चार का आरोप लगने के बाद भी अधिकारी मौन रहते हैं?

संबंधित अधिकारियों की लापरवाही 

वे कहते हैं कि शहर में काफी नालियों के ढक्कन टूटे हुए हैं। उनकी मरम्मत का काम नहीं हो रहा है। उल्हासनगर महानगरपालिका के सामने मुख्य मार्ग जो १७ सेक्शन लालबहादुर शास्त्री चौक की तरफ जाता है, उस पर बनाए गए नाले का ढक्कन टूट गया है, जो बड़ी दुर्घटना को आमंत्रित कर रहा है। शहर में सफाई विभाग कार्यरत है। उन्हें टूटे ढक्कन की रिपोर्ट सार्वजनिक विभाग को देनी रहती है जोे शायद वो नहीं करते हैं?

क्या कहते हैं अधिकारी?

इस मुद्दे को लेकर शहर अभियंता संदीप जाधव का कहना है कि दुर्घटना युक्त ढक्कन की जानकारी उन्हें नहीं है। मनपा के सामने वाले टूटे ढक्कन पर जल्द से जल्द कार्रवाई की जाएगी। लेकिन कई लोगों को यह केवल एक आश्वासन लगता है। यहां के लोगों का कहना है कि अधिकारी केवल झूठे वादे करते हैं, करते कुछ भी नहीं। उनकी लापरवाही का खामियाजा आम इंसान को भुगतना पड़ता है।

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