मुख्यपृष्ठनमस्ते सामनासिटीजन रिपोर्टर : रेलवे की वन रुपी क्लीनिक योजना हो गई भंगार!

सिटीजन रिपोर्टर : रेलवे की वन रुपी क्लीनिक योजना हो गई भंगार!

उल्हासनगर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश में नई-नई लुभावनी योजनाओं का जहां आए दिन उद्घाटन करते रहते हैं। वहीं रेल यात्रियों को दी जानेवाली एक-एक योजना कानूनी अड़चन दिखाकर रेलवे बंद करती जा रही है, जिसके चलते रेल यात्री परेशान हो रहे हैं। ‘दोपहर का सामना’ के सिटीजन रिपोर्टर विश्वनाथ सावंत ने रेलवे के इस कथित सेवा की पोल खोली है।
विश्वनाथ सावंत कहते हैं कि भारत सरकार के सत्ताधारी आए दिन नए-नए प्रलोभन दे रहे हैं। इससे देश के सामान्य व्यक्ति से लेकर किसान, शिक्षक और सभी वर्ग के लोग परेशान हैं। रेलवे विभाग के चलते जूता पॉलिश से लेकर वृद्ध समेत तमाम लोग परेशान हैं। इतना ही नहीं, रेलवे यात्रा के दौरान तबीयत खराब होने पर तुरंत उपचार और परीक्षण हो सके, इसके लिए वन रुपी क्लीनिक योजना शुरू की गई है। उस योजना को रेलवे ने बंद कर दिया है, जिसके कारण रेल यात्रियों को अपना उपचार करवाने में काफी दिक्कत हो रही है। बता दें कि रेलवे ने वन रुपी क्लीनिक योजना को रेलवे क्षेत्रों में कई जगहों पर शुरू किया था। रेलवे केयर संचालक से निर्धारित रकम लेती थी। उक्त केयर सेंटर रेलवे के आदेश पर विगत महीने बंद कर दिया गया, जिसके कारण परिसर के काफी लोगों के साथ ही रेलवे प्रवासी उपचार के लिए परेशान बताए जा रहे हैं। इतना ही नहीं, सैकड़ों ठाणे क्षेत्र के शूज साइन अर्थात जूता पॉलिश करनेवाले लोगों को कानूनी अड़चन बताकर रेलवे ने बंद कर दिया है। इसके कारण शूज पॉलिश करनेवाले लोग जो रोज खाते-कमाते हैं। ऐसे लोगों के सामने भूखे मरने की नौबत आ गई है। शूज पॉलिश करनेवालों ने आंदोलन का सहारा लेते हुए रेलवे को नोटिस सौंपी है। इतना ही नहीं, रेलवे ने वरिष्ठ नागरिकों को रेलवे यात्रा के दौरान दी जानेवाली यात्रा छूट को कोरोना काल से ही बंद कर दिया है। रेलवे ने शौचालय से लेकर टिकट घर तक सभी जगहों पर जीएसटी लगा रखी है। भाजपा सरकार जहां एक तरफ नई-नई लुभावनी योजनाओं को शुरू कर लोगों को फांस रही है, तो वहीं दूसरी तरफ जनता को टैक्स रूपी फांस में फंसाकर इतनी महंगाई लाद दी है कि लोगों का जीना हराम हो गया है। यही हाल वन रुपी केयर योजना का भी है। इसे बंद करने के पीछे रेलवे की क्या मंशा है वो तो रेलवे ही जाने?
रेलवे की मंशा रेल यात्रियों के प्रति कैसी है? इसका नजारा बंद होती योजना से दिखाई दे रहा है? रेलवे को अपनी इस मंशा का खुलासा करना चाहिए। रेलवे की काफी योजनाएं मजाक बनकर रह गई हैं। उल्हासनगर रेलवे स्टेशन के दायरे में उल्हासनगर कैप नंबर चार की तरफ वन रुपी क्लीनिक योजना शुरू की गई थी, जिसका बड़ी संख्या में लोग लाभ ले रहे थे, लेकिन क्लीनिक बंद होने से योजना भंगार हो गई है।

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