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सिटीजन रिपोर्टर : वाह रे उल्हासनगर! … नाली है पर सड़क नहीं

उल्हासनगर
उल्हासनगर पहला शहर होगा, जहां पर नियम काम नहीं करता है। पैसे व दिशाहीन राजनीति के कारण उल्हासनगर के लोक कानून के आगे अधिकारी झुकते हैं। उल्हासनगर की सड़क को ही ले लीजिए। एक भी सड़क सीधी नहीं हैं। आश्चर्य की बात तो यह है कि इमारत के नीचे से यानी इमारत के अंदर से पैदल चलने का रास्ता बनाया गया है। शहर की नगर रचना में अंतर्राष्ट्रीय महामार्ग १०० फीट और महामार्ग १०० फीट है। शहर के अंदर बाईपास रोड को १२० फीट चौड़ा करने का प्रस्ताव है। ‘दोपहर का सामना’ के सिटीजन रिपोर्टर सुभाष सिंह ने उल्हासनगर के मार्ग के विषय में उल्हासनगर के मनपा प्रशासन व जनता की व्यथा बयां की है।
सुभाष सिंह का कहना है कि उल्हासनगर जैसा उल्टा कानून दुनिया में कहीं नहीं होगा। मनपा यदि किसी भी सड़क पर मार्किंग देती है तो उसे रोकने वाले भी वहीं खड़े रहते हैं। कल्याण-बदलापुर महामार्ग इसका जीता-जागता उदाहरण है। करीब तीन सौ दुकानदार उच्च न्यायालय गए थे। उनमें से कई ने अपने केस वापस ले लिए हैं। मनपा के रोड कटिंग को गलत बताकर नौ लोग अब भी उच्च न्यायालय में केस लड़ रहे हैं।
उल्हासनगर में कहीं सड़क है तो नाली नहीं, कहीं नाली है तो सड़क नहीं। पूर्व प्रभारी आयुक्त चंद्रशेखर के समय में बनी सड़क का पदचारी पथ इमारत के अंदर से होकर गया है। हाल ही में उल्हासनगर के वैंâप नंबर तीन के पंजाबी कॉलोनी चौक से किटिकरे अस्पताल के सामने तक बन रही सड़क पर नाली बराबर नहीं होने के कारण एक रिक्शा नाली में गिर गया था। हालांकि, कोई जनहानि नहीं हुई।
उल्हासनगर में अवैध निर्माण की भरमार के कारण शहर की सड़कों की सूरत बिगड़ गई है। आए दिन उल्हासनगर के लोग गटर, नालियों और गड्ढों में गिरकर घायल हो रहे हैं। उतना चौड़ा रास्ता मुश्किल से नजर आता है। सड़कों की अलग-अलग चौड़ाई के कारण शहर की संरचना ही अलग हो गई है। ऐसे रूटों के कारण वाहनचालकों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
यदि मनपा प्रशासन शक्ति का प्रयोग करता है, तो उसे राजनीतिक या धन के आधार पर चुप करा दिया जाता है। जरूरत पड़ने पर ट्रांसफर भी किया जाता है। उल्हासनगर मनपा बने २६ वर्ष हो गए हैं। इस दौरान करीब ५८ आयुक्त बदले गए हैं। उल्हासनगर में अकर्मण्य आयुक्त ही मुश्किल से तीन साल पूरे कर सके।
उल्हासनगर शहर अभियंता संदीप जाधव ने बताया कि पंजाबी कॉलोनी सड़क का निर्माण किया गया है, लेकिन आगे श्री रमेश मुकने के घर के ऊपर कुछ दूरी तक सड़क संकरी है। अतिक्रमण विभाग को अतिक्रमण हटाकर मार्किंग देनी है। जब तक मार्किंग नहीं होगी, नाली बनाना असंभव है।

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