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महायुति में घमासान! … शिंदे गुट के बराबर मिले दादा गुट को हिस्सेदारी …भुजबल ने किया स्पष्ट

सामना संवाददाता / मुंबई
देशभर में दो महीने बाद लोकसभा चुनाव होनेवाले हैं और उसी हिसाब से राजनीतिक घटनाक्रम भी तेज हो गया है। राष्ट्रीय स्तर पर इंडिया अलायंस ने भाजपा के खिलाफ मिलकर चुनाव लड़ने के फैसले की घोषणा की है। इसी पृष्ठभूमि में जहां एक ओर सीट बंटवारे पर चर्चा चल रही है, वहीं दूसरी ओर महाराष्ट्र में भी सीट बंटवारे को लेकर महायुति में घमासान छिड़ गया है। २०२२ में शिवसेना से गद्दारी करके शिंदे गुट सामने आया और भाजपा के साथ मिलकर राज्य में सरकार बना ली।
पिछले साल अजीत दादा गुट भी सरकार में शामिल हुआ था। अब इन तीनों के बीच जगह का बंटवारा कैसे होगा? इस पर चर्चा शुरू हो गई है। राज्य में जहां भाजपा और एकनाथ शिंदे गुट की स्थिर सरकार थी, वहीं अजीत पवार के नेतृत्व में सरकार में शामिल एक गुट शामिल हुआ था। इसके बाद अजीत पवार को उप मुख्यमंत्री और ८ अन्य विधायकों को मंत्री पद दिया गया। इस समय शिंदे गुट के विधायकों के मंत्रिमंडल विस्तार में देरी की चर्चा चल रही थी, वहीं अजीत दादा गुट ने सत्ता में समान बंटवारा हो, ऐसी मांग करके पुन: चर्चा छेड़ दी है। अजीत पवार गुट के विधायक और सरकार में मंत्री छगन भुजबल ने कल सुबह मीडिया से बात करते हुए इस संबंध में अजीत पवार गुट की स्थिति स्पष्ट की। छगन भुजबल ने कहा है कि अजीत पवार गुट को सत्ता में बराबर की हिस्सेदारी मिलनी चाहिए। ‘हमें उतनी ही सीटें मिलनी चाहिए, जितनी शिंदे शिंदे गुट को मिलती हैं। इस पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। उनके पास करीब ४० विधायक हैं। हमारे पास भी करीब ४० विधायक हैं। इसलिए उन्हें जो भी मिले, हमें भी उतने ही मंत्री पद मिलने चाहिए।’ हमें सांसद की उतनी ही सीटें मिलनी चाहिए, जितनी उन्हें मिलती हैं।’ इस मौके पर छगन भुजबल ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि इसमें कुछ भी गलत है। एक तरफ जहां मराठा आरक्षण और राज्य में आरक्षण के प्रतिशत को लेकर मनोज जरांगे पाटील और छगन भुजबल के बीच विवाद था, वहीं दूसरी तरफ लोकसभा सीटों के आवंटन पर कोई नया विवाद खड़ा होगा क्या?

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