मुख्यपृष्ठस्तंभक्लीन बोल्ड : सस्ते में मिला तो चहक उठी काव्या

क्लीन बोल्ड : सस्ते में मिला तो चहक उठी काव्या

अमिताभ श्रीवास्तव

कोई चीज महंगी हो और वो सस्ते में मिल जाती है तो खुशी होती ही है। अब देखिए न, आईपीएल नीलामी में भी ऐसा ही कुछ हुआ। दरअसल, हैदराबाद ने एक मैच विनर प्लेयर को सस्ते में अपने स्क्वॉड से जोड़ा तो काव्या मारन खुशी का इजहार करने से खुद को रोक नहीं पार्इं। अब उनकी मुस्कुराते हुए यह फोटोज सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। श्रीलंका के वानिंदु हसरंगा की गिनती वर्ल्ड के बेहतरीन ऑलराउंडर्स में होती है। वो स्पिन गेंदबाजी और निचले क्रम के ऑर्डर में विस्फोटक बल्लेबाजी करने में माहिर हैं। इस ऑक्शन में हैदराबाद टीम ने उन्हें १.५ करोड़ के बेस प्राइस पर खरीदा। इतनी कम कीमत पर बिग डील लॉक करने के बाद काव्या मारन की खुशी देखते ही बन रही थी। काव्या मारन की हंसते हुए फोटोज सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रही हैं। वह वानिंदु हसरंगा को खरीदने के बाद काफी खुश नजर आर्इं। उन्हें हंसते हुए इन फोटोज में साफ देखा जा सकता है।

करोड़ों के कंगारू
आईपीएल इतिहास में अब तक सबसे महंगे बिके हैं कंगारू, जिनकी एक गेंद की कीमत ही लाखों रुपयों की होगी। जी हां, मिनी ऑक्‍शन में विश्व चैंपियन ऑस्ट्रेलिया के कप्तान पैट कमिंस और मिचेल स्टार्क पर बड़ी बोली लगी। दोनों खिलाडियों ने २० करोड़ का आंकड़ा पार कर पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए। सनराइजर्स हैदराबाद ने तेज गेंदबाज कमिंस को २०.५० करोड़ रुपए में खरीदा, लेकिन कुछ ही देर बाद में उनके साथी तेज गेंदबाज मिचेल स्टार्क ने २४.७५ करोड़ रुपए के साथ उन्हें पीछे छोड़ दिया। स्टार्क पर कोलकाता नाइटराइडर्स ने अब तक का सबसे बड़ा दांव लगाया। दुबई में हुए मिनी ऑक्‍शन में सबसे ज्यादा धन विदेशी क्रिकेटरों पर बरसा है। इस पूरे सीजन में स्टार्क को २४.७५ करोड़ मिलेंगे। जिनकी १.७६ करोड़ रुपए प्रति मैच कीमत है और जो ओवर वो फेंकेंगे उसमें हर गेंद की कीमत ७.३६ लाख रुपए होगी। इसी तरह ३० वर्षीय कमिंस को सीजन में २०.५० करोड़ मिलेंगे यानी १.४६ करोड़ रुपए प्रति मैच कीमत है और उनकी हर गेंद की कीमत ६.१० लाख रुपए होगी। है न दिलचस्प। अब देखना ये है कि सबसे महंगे तो बन गए हैं वो, मगर क्या आईपीएल में उनका प्रदर्शन वैसा रहता है जैसी कीमत है।

शुभ-शुभ शुभम
किस्मत है यह। और किस्मत यदि हो तो ऐसी ही होनी भी चाहिए, जो शुभम दुबे की है। पान का ठेला लगाकर घर चलाने वाले पिता का यह पुत्र आज करोड़ों में खेल रहा है, जबकि कभी प्रथम श्रेणी टूर्नामेंट भी नहीं खेला। आखिर ऐसा हो वैâसे सकता है? है न अजीब। जी हां, फर्स्ट क्लास क्रिकेट (चार दिनी रणजी ट्रॉफी) न खेलने वाले विदर्भ के शुभम दुबे ने मिली रकम से पंडितों को हैरान कर दिया। यहां बात यह भी ध्यान देने वाली है कि शुभम ने विदर्भ के लिए ज्यादा क्रिकेट नहीं खेली है लेकिन अपने ३०वें साल में चल रहे हैं, इसके बावजूद प्रâेंचाइजी टीमों के बीच शुभम के लिए जोरदार मुकाबला देखने को मिला। शुभम दुबे लेफ्टी बल्लेबाज हैं, जो घरेलू क्रिकेट में विदर्भ के लिए खेलते हैं और उनकी यूएसपी (यूनीक सेलिंग प्वाइंट्स) यह है कि वो मिडिल ऑर्डर में आते हैं और उन्होंने टीम के लिए कई मैच फिनिश किए। इसी बात ने फ्रेंचाइजी के मैनेजरों ने उनका ध्यान अपनी ओर खींचा। यही वजह रही कि टीमों के बीच शुभम के लिए खासी मारामारी देखने को मिली।

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