मुख्यपृष्ठखेलक्लीन बोल्ड : दस लाख लोग

क्लीन बोल्ड : दस लाख लोग

अमिताभ श्रीवास्तव

हिंदुस्थान में क्रिकेट की लोकप्रियता अमेरिका में जैसे बेसबॉल, बास्केट बॉल या यूरोप में जो फुटबॉल को प्राप्त है, वैसी है और दर्शकों का हुजूम उमड़ पड़ता है। बात यदि विश्वकप क्रिकेट की हो तो बात खास ही है तभी तो इस बार विश्वकप मुकाबलों के दौरान दस लाख से अधिक लोग स्टेडियम में मैच देख चुके हैं। यह आईसीसी के इतिहास में स्टेडियम में सबसे ज्यादा दर्शकों की मौजूदगी वाला टूर्नामेंट बनने की राह पर है। आईसीसी ने एक विज्ञप्ति में कहा कि अभी टूर्नामेंट में छह मैच बाकी हैं और शुक्रवार को यहां नरेंद्र मोदी स्टेडियम पर अफगानिस्तान और दक्षिण अप्रâीका के मैच में दस लाख दर्शकों का आंकड़ा छू लिया गया है। टूर्नामेंट ने डिजिटल और अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर देखे जाने के कई रिकॉर्ड पहले ही तोड़ दिए हैं। आईसीसी के इवेंट प्रमुख क्रिस टेटली ने कहा, ‘दस लाख से अधिक दर्शक संख्या और रिकॉर्डतोड़ दर्शकों के चलते आईसीसी पुरुष क्रिकेट विश्वकप २०२३ ने वनडे प्रारूप में दर्शकों की रुचि और विश्व कप की लोकप्रियता की बानगी पेश की है। नॉकआउट चरण में और रिकॉर्ड टूटने की उम्मीद है।

किसे कहा औरतबाज?
मामला जब कोर्ट में हो और विवाद कायम हो तो आरोप लगाने से पहले सोचा जाना चाहिए। सोचा भी है शायद तभी तो केवल संकेतों में अपनी बात कही है। नफरत इतनी भी नहीं होनी चाहिए, जब पति चुपचाप अपने काम से काम रख रहा हो। दरअसल, मोहम्मद शमी जहां नाम कमा रहे हैं, वहीं उनकी बीवी ईर्ष्या में जल रही है। यह ईर्ष्या नहीं तो क्या है? जब उससे शमी की कामयाबी जिससे देश गौरवान्वित हुआ हो के बारे में पूछा जाता है तो वो चुप नहीं रहती, बल्कि ताना कसती है। खैर सच जो हो मगर, इधर शमी की बीवी हसरत जहां ने सोशल मीडिया पर जो लिखा, वो लोगोें को रास नहीं आ रहा है। उन्होंने एक वीडियो पोस्ट करते हुए वैâप्शन लिखा, `अगर बीवी औरतबाज पति की करतूत दुनिया के सामने खोले तब सारे औरतबाज एकत्रित होकर उस बीवी को ही झूठा और बदनाम करने की कोशिश करते हैं, फिर भी फायदा कुछ नहीं होता, खुद की ही कब्र खुदती जाती है। इसी का नाम है कर्मा।’ ये उन्होंने किसके बारे में लिखा सब जानते हैं। जो हो पर अदालत जो पैâसला दे, वो मान्य होना ही चाहिए।

अब है असली मुकाबला
विश्वकप में सभी नौ मैच जीतकर टीम इंडिया ने एक तरह से विश्व की हर टीम को हरा दिया है, मगर मुकाबला तो अब असली है। इसमें जीतने का मतलब है, विश्वकप को चूमने का अधिकार मिलना। यही है असली मौका और अब किसी भी गलती का कोई काम नहीं है। जो हारा वो बाहर। टीम इंडिया भले ही पीक पर हो, किंतु उधर न्यूजीलैंड भी फॉर्म में आ चुकी है। खास बात तो ऑस्ट्रेलिया की है, जो अपने पहले मुकाबलों में भले पीछे रही हो, किंतु अब उसको हरा पाना टेढ़ी खीर है। बात पहले सेमीफाइनल की करें, जिसमें रोहित सेना को विलियमसन की फौज से भिड़ना है। विलियमसन के साथ-साथ उसके सारे खिलाड़ी मुस्तैदी से मैदान पर डट गए हैं। रचिन रविंद्र हों या खुद केन विलियमसन या बोल्ट हो या सेनेटर सब के सब टीम इंडिया से कमतर नहीं हैं, इसलिए रोहित शर्मा एंड कंपनी को उच्चतम रणनीति से मैदान पर उतरना होगा। यही एकमात्र मौका है, जब फॉर्म में बनी हुई टीम जीत के सिलसिले को बनाए रखे।
(लेखक वरिष्ठ खेल पत्रकार व टिप्पणीकार हैं।)

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