मुख्यपृष्ठखेलक्लीन बोल्ड : चोपड़ा के खिलाफ साजिश

क्लीन बोल्ड : चोपड़ा के खिलाफ साजिश

अमिताभ श्रीवास्तव
इस आशंका से कोई मुंह नहीं मोड़ सकता कि भाला फेंक के विश्व विजेता नीरज चोपड़ा के खिलाफ एक अंतर्राष्ट्रीय साजिश चल रही है। दरअसल, नीरज ने पूरी दुनिया पर अपने हुनर का दबदबा बनाया हुआ है। वो हिंदुस्थान खेलों के ब्रांड एंबेसडर की तरह हैं। न केवल खेलों के लिए, बल्कि युवाओं और आने वाली नई पौध के प्रेरणास्त्रोत भी हैं। हिंदुुस्थान नीरज चोपड़ा के चेहरे मात्र से अपने खेलों को आसमान पर पहुंचा रहा है। यह सब दुनिया में तथा खासकर उन देशों के लिए आंख में किरकिरी है, जो पूंजीवादी हैं और अपनी सत्ता हर विभाग में जमाना चाहते हैं। हिंदुस्थान जैसे विकासशील देश को आगे बढ़ते नहीं देखना चाहते हैं। एकमात्र नीरज चोपड़ा हैं, जो आज एक सनसनी के रूप में विश्व विख्यात हैं। लिहाजा, उनके रिकॉर्ड और खेल को प्रभावित कर हिंदुस्थान को पीछे धकेलने का दुस्साहस किया जा सकता है। हॉकी में हम साफतौर पर यह देख ही चुके हैं। अब नीरज को लेकर है। चीन की बदमाशी पिछले दिनों पूरी दुनिया ने देखी। अपने पहले थ्रो में नीरज ८७ मीटर के आगे निकल चुके थे और तकनीकी खराबी का हवाला देकर उनके थ्रो को दोबारा किया गया। यह मानसिक रूप से परेशान करने का तरीका था। हुआ भी ऐसा ही। नीरज इसके बाद अपने तीन थ्रो में कुछ खास नहीं कर सके, मगर जो चैंपियन होता है वो चैंपियन ही होता है। ८८.८ मीटर भाला फेंक कर नीरज ने चीन के षड्यंत्र पर जोरदार प्रहार किया। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि यदि बड़ी प्रतियोगिताओं में लगातार ऐसा ही कुछ किया जाता रहा तो यह नीरज के लिए तकलीफदेय हो सकता है। दुनिया यही चाहती है।

ट्रेक एंड फील्ड की नई सनसनी
कौन है ये खूबसूरत, घुंघराले बालों वाली आकर्षक धाविका? जिसने देखते ही देखते दुनिया में अपने नाम का सिक्का जमा लिया। यह है हिंदुस्थान की २३ वर्षीया हरमिलन बैंस। माधुरी सिंह नामक एक धाविका थी, जिसने २१ साल पहले एशियाड में सिल्वर जीता था। याद आया? उनकी बेटी है हरमिलन। अपनी मां के इतिहास को दोहराते हुए एशियाड में दो सिल्वर पदक जीतकर देश को देने वाली हरमिलन की सुंदरता पर हर कोई मोहित है। हरमिलन के पिता अमनदीप बैंस भी दक्षिण एशियाई खेलों में पदक जीत चुके हैं। यानी माता पिता की यह बेटी भी देश के लिए अपना योगदान दे रही है। जो दूसरा ८०० मीटर का सिल्वर उन्होंने जीता, वो उन्हें फंसा देने के कारण अन्यथा गोल्ड ही हाथ में आता। जब उन्होंने अपनी गति तेज की तो दौड़ रही धविकाओं ने उन्हें अपने बीच में फांस लिया था। जल्द ही वो इससे निकली, मगर तब तक देर हो चुकी थी। जरा सी भी गति में परिवर्तन होता है तो दौड़ का नतीजा भी बदल जाता है।

सोशल मीडिया से बाज आओ सिंधु!
सोशल मीडिया की लत प्रतिभा को तो तहस नहस करती ही है, अपने उच्च स्थान को भी प्रभावित करती है। खिलाड़ी जब अपने खेल पर फोकस्ड नहीं रहता, तब प्रदर्शन बिगड़ता है। सायना नेहवाल का उदाहरण सामने है। अब पीवी सिंधु भी उसी राह पर हैं। दुनिया की कभी नंबर वन शटलर रह चुकी सिंधु आज हारती जा रही हैं। पिछले कुछ समय से वो सेमीफाइनल तक भी नहीं पहुंच रही हैं। एशियाड में क्वॉर्टर फाइनल मुकाबले में सीधे दो गेमों में हारकर बाहर हो जाने वाली सिंधु सोशल मीडिया पर ज्यादा सक्रिय रहती हैं। क्या खाया, क्या पिया, किससे मिली, कब मिली, कहां जा रही हैं, क्या देखा आदि हर एक क्षण की तस्वीरें और उस पर अपनी बात लिखकर सक्रिय रहने की आदत उनके खेल को प्रभावित कर रही है। हालांकि, वो इसे नहीं मानेंगी मगर यही वो मनोविज्ञान होता है, जिसे हर आदमी नकारेगा और उसके पतन का सबसे बड़ा कारण यही होता है। जहां फोकस करना चाहिए वो सेकंडरी बन जाता है तो नतीजा भी यही निकलेगा, जैसा कल हुआ। सिंधु आसानी से पराजित हो गर्इं।
(लेखक वरिष्ठ खेल पत्रकार व टिप्पणीकार हैं।)

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