मुख्यपृष्ठखेलक्लीन बोल्ड : बिसात पर इतिहास

क्लीन बोल्ड : बिसात पर इतिहास

अमिताभ श्रीवास्तव

शतरंज की दुनिया में हिंदुस्थान का तिरंगा फिर लहराया है। विश्वनाथन आनंद के बाद अब बिसात पर डी. गुकेश जैसे सबसे कम उम्र के खिलाड़ी ने इतिहास रचा है। जी हां, केवल १७ साल के ग्रैंडमास्टर डी. गुकेश ने टोरंटो में वैंâडिडेट्स शतरंज टूर्नामेंट जीतकर इतिहास रच दिया। वे वर्ल्ड खिताब के लिए सबसे कम उम्र में चुनौती देने वाले खिलाड़ी बन गए हैं। अब वर्ल्ड चैंपियन खिताब के लिए उनकी भिड़ंत चीन के डिंग लिरेन से होगी। गुकेश यह टूर्नामेंट जीतने वाले दूसरे भारतीय हैं। उनसे पहले पांच बार के वर्ल्ड चैंपियन विश्वनाथन आनंद ने २०१४ में यह टूर्नामेंट जीता था। तब वे ४५ साल के थे।​​​​​​​ गुकेश ने जीत के बाद कहा, `बहुत खुशी हो रही है। मैं उस रोमांचक खेल (फैबियो कारुआना और इयान नेपोमनिआचची के बीच) को देख रहा था, फिर मैं अपने सहयोगी (ग्रिगोरी गैजेव्स्की) के साथ टहलने गया, मुझे लगता है कि इससे मदद मिली।’

इस्तीफा दो डीके
डीके बोलो तो दिनेश कार्तिक और उनसे इस्तीफा किस चीज का मांगा जा रहा है? क्यों मांगा जा रहा है? दरअसल, डीके ने अपने खेल से सबको न केवल प्रभावित किया है, बल्कि विश्वकप की टीम के लिए भी मजबूत दावा ठोका है। खुद उन्होंने विश्वकप खेलने की इच्छा व्यक्त कर डाली है, जबकि वो उम्रदराज हो चुके हैं। ऐसे में पूर्व ऑलराउंडर टॉम मूडी ने बहुत ही रुचिकर बयान दिया है। कमेंट्री करते हुए कार्तिक के मामले पर विमर्श के दौरान मूडी ने कहा कि सीनियर विकेटकीपर बल्लेबाज को अगर विश्वकप में खेलना है, तो उन्हें पार्ट-टाइम कमेंटेटर के रोल से इस्तीफा देना होगा। उन्होंने कहा कि उनका प्रस्ताव ठीक बात है, लेकिन मेरा सोचना यह है कि टीम इंडिया के लिए उपलब्ध रहने के लिए कार्तिक को विश्वकप कमेंट्री टीम से हटना होगा। कार्तिक टूर्नामेंट शुरू होने से पहले ही कह चुके हैं कि यह संस्करण उनका आखिरी आईपीएल होगा। जहां तक इस सीजन की बात है, तो आरसीबी ने अभी तक टूर्नामेंट में लगभग आधा पड़ाव पार कर लिया है और दिनेश कार्तिक ने बंगलुरु के लिए कोहली के बाद दूसरे सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज हैं। कार्तिक ने ८ मैचों की ७ पारियों में ६२.७५ के औसत से २५१ रन बनाए हैं। इसमें दो बेहतरीन अर्द्धशतक शामिल हैं। स्ट्राइक रेट में वे कोहली पर भी भारी हैं। कार्तिक का स्ट्राइक-रेट १९६.०९ का है। अब देखने वाली बात होगी कि यह प्रदर्शन सेलेक्टरों का नजरिया बदल पाता है या नहीं।

नियमों की आड़ में खिलवाड़
क्या लगता है आईपीएल जैसे आयोजन क्यों होते हैं? दर्शक मैच देखने क्यों आते हैं? एक जगह दिग्गज खिलाड़ियों को एकत्र किया जाए। दर्शक उनके खेल का आनंद ले सकें। अब जब ये दोनों पर ही कुठाराघात हो तो आईपीएल आयोजन का क्या तुक? इसमें कोई देश या खेल का अहित तो हो नहीं रहा। यह शुद्ध मनोरंजन है, फिर क्यों इसकी आड़ में खिलवाड़ किया जा रहा दर्शकों के मनोभावों के साथ। क्रिकेट के नियमों के साथ। दिग्गज खिलाड़ियों के साथ? दरअसल, जब विराट कोहली को एक नोबॉल पर आउट दिया गया तो क्रिकेट की ही नहीं, बल्कि एक स्टार खिलाड़ी, दर्शकों की मनोभावना और खेल भावना के साथ गंदा मजाक किया गया। नियमों की दुहाई देकर विराट को पैवेलियन भेज दिया गया। दर्शकों के मनोरंजन को खत्म कर दिया गया। विराट जैसे खिलाड़ियों को देखने आते हैं दर्शक और जब संदेह की बात हो तो इसका लाभ दिया जाना चाहिए ऐसे खिलाड़ियों को। क्यों उन्हें बाहर कर दिया गया नियमों की आड़ में? जबकि लगभग हर समीक्षक कहता नजर आया कि वो आउट नहीं हैं। आउट थे भी नहीं। इसके बावजूद एक महान खिलाड़ी के खेल को देखने पहुंचे हजारों दर्शकों को मायूस कर दिया गया। यह क्रिकेट की ही नहीं, बल्कि दर्शकों की भावनाओं की हत्या है।

(लेखक वरिष्ठ खेल पत्रकार व टिप्पणीकार हैं।)

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