मुख्यपृष्ठखेलक्लीन बोल्ड : स्पोर्ट्स हर्निया के शिकंजे में सूर्या

क्लीन बोल्ड : स्पोर्ट्स हर्निया के शिकंजे में सूर्या

अमिताभ श्रीवास्तव

तो अब लगभग तय हो गया है कि सूर्यकुमार यादव आईपीएल नहीं खेलेंगे। चोटिल हो जाने के बाद अब खबर आ रही है कि उन्हें स्पोर्ट्स हर्निया हो गया है। इस नए नाम की बीमारी को लेकर आम प्रशंसक बड़े हैरान हैं, ये क्या बला होती है? सूर्या का उपचार जर्मनी में होगा, ऐसी खबर भी है। बात स्पोर्ट्स हर्निया की की जाए, क्योंकि यही रहस्य है। दरअसल, स्पोर्ट्स हर्निया ग्रोइन एरिया या पेट के निचले हिस्से में मांसपेशियों, लिगामेंट का फटना या खिंचाव होना होता है। ऐसा जरूरी नहीं कि स्पोर्ट्स हर्निया स्पोर्ट्स खेलने वालों को ही होता है, लेकिन यह खेल खेलने वाले लोगों में अधिक होता है। स्पोर्ट्स हर्निया होने के ज्यादातर चांस फुटबॉल, कुश्ती और आइस हॉकी जैसे खेलों में होते हैं। अब जान गए न कि ये क्या बला है। सूर्या को टी-२० विश्वकप तक फिट हो जाने के लिए आईपीएल से मुक्त रखा जा सकता है। वे फिलहाल, बंगलुरु में नेशनल क्रिकेट एकेडमी में हैं। दो-तीन दिन में वे ऑपरेशन कराने के लिए जर्मनी के म्यूनिख के लिए उड़ान भरेंगे।

पलटूराम क्यों बने रायडू?
अंबाती रायडू का इन दिनों खूब हल्ला है। दरअसल, वो ऐसे पलटूराम बन गए हैं कि सब देख- सुनकर आश्चर्य कर रहे हैं, हंस भी रहे हैं। बात ही कुछ ऐसी है। अब सोचिए कोई किसी राजनैतिक पार्टी में शामिल हो, आयोजन हो और उसके चंद दिनों बाद ही वो पार्टी छोड़ दे। अंबाती रायडू के राजनैतिक सफर का यही किस्सा है। आठ दिन के राजनेता अंबाती ने पार्टी छोड़ दी। क्यों छोड़ी? पूर्व क्रिकेटर अंबाती रायडू ने हफ्तेभर बाद ही वाईएसआर कांग्रेस पार्टी छोड़ने को लेकर अब अपना बयान जारी‍ करते हुए कारण बताया है। रायडू ने पहले की पोस्ट में लिखा था कि वह कुछ समय के लिए सियासत से दूर रहना चाहते हैं, वहीं अब उन्‍होंने कहा है कि संयुक्त अरब अमीरात लीग के दूसरे सीजन में वे मुंबई इंडियंस प्रâेंचाइजी एमआई अमीरात के लिए खेलने को लेकर प्रतिबद्ध हैं। बता दें कि रायडू ने आंध्र प्रदेश की सत्ताधारी पार्टी वाईएसआर को २८ दिसंबर को ही ज्वाइन किया था और बमुश्किल आठ दिन बाद पार्टी छोड़ भी दी थी।

नई पीढ़ी में भूख नहीं
एक बार जीत लेने के बाद संतुष्ट हो जाती हैं। नई पीढ़ी में भूख ही नहीं बची है। जी हां, मुक्केबाजी दुनिया की बेताज रानी मैरीकॉम का कहना है। देश की दिग्गज मुक्केबाज एमसी मैरीकॉम छह बार की विश्व चैंपियन और २०१२ लंदन ओलंपिक गेम्स की कांस्य पदक विजेता रह चुकी हैं। उन्होंने कहा कि मैं सुपर फिट हूं और अधिक से अधिक सफलता हासिल करना चाहती हूं। यह भूख मुझमें है। युवा पीढ़ी एक बार चैंपियन बनकर संतुष्ट हो जाती है। यदि मेरी तरह उनमें भी जज्बा और भूख हो तो हमारे देश में ढेर सारे पदक होंगे। मैरीकॉम ने कहा कि मैं ४१ साल की हूं। मैं इस साल से कोई भी इंटरनेशनल (एमेच्योर) प्रतियोगिता में नहीं उतर सकती, क्योंकि उम्र एक सीमा है। हालांकि, मैं अपने खेल को एक, दो या तीन साल तक जारी रखना चाहती हूं। मैरीकॉम ने कहा कि जब उन्होंने मुक्केबाजी शुरू की थी, तब की तुलना में खेलों में अधिक सुविधाएं और विकल्प होने के बावजूद वर्तमान पीढ़ी में पर्याप्त जज्बा नहीं है। हालांकि, कम उम्र की कई महिलाओं के मुक्केबाजी में उतरने पर खुशी जताते हुए उन्होंने कहा कि मेरी कड़ी मेहनत सफल हुई। अब बहुत सारी मैरीकॉम आ रही हैं।

(लेखक वरिष्ठ खेल पत्रकार व टिप्पणीकार हैं।)

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