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पांच सालों के लिए सफाई का ठेका : सरकारी अस्पतालों में १७६ करोड़ की ‘सफाई’

सामना संवाददाता / मुंबई
सरकारी सेवाओं की आउटसोर्सिंग को लेकर कर्मचारी संगठनों के विरोध को नजरअंदाज करते हुए राज्य सरकार प्रदेश के १५० से अधिक सरकारी और मेडिकल कॉलेजों में सफाई के लिए निजी कंपनियों को पांच सालों के लिए १७६ करोड़ से अधिक का ठेका देगी। विधायकों और सांसदों की चार कंपनियों पर मेहरबानी रखने के लिए ये ठेके देने का आरोप लगाया जा रहा है। इस बीच कामगार संगठनों ने मांग की है कि सफाई कामगारों के रिक्त पद जल्द से जल्द भरे जाएं।
राज्य में सरकारी, चिकित्सा आयुर्वेद, होम्योपैथी कॉलेजों और उनसे संबद्ध अस्पतालों की सफाई के लिए ४ कंपनियों एचएलएल इन्फोटेक सर्विसेज, एचसीसीसी टेलीकम्युनिकेशंस, एनबीसीसी और माइक्रोन के नामों का चयन किया गया है। चिकित्सा शिक्षा एवं औषधि विभाग ने सरकारी अस्पतालों में मैकेनिकल सफाई के लिए टेंडर प्रक्रिया को मंजूरी दे दी है। इन ४ कंपनियों को टेंडर प्रक्रिया में प्राथमिकता दी जाएगी। राज्य के सरकारी अस्पतालों, मेडिकल, आयुर्वेद, डेंटल कॉलेजों में साफ-सफाई के लिए १७६ करोड़ २५ लाख ६४ हजार ५०० रुपए का ठेका है। राज्य सरकार के कामगार संगठनों ने स्वच्छता के लिए इस आउटसोर्सिंग ठेके का कड़ा विरोध किया है। राज्य सरकारी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी मध्यवर्ती संगठन के अध्यक्ष भाऊसाहेब पठान ने मांग की है कि सबसे पहले सरकारी अस्पतालों में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के रिक्त पद भरे जाएं। सरकारी अस्पतालों में ६० फीसदी पद खाली हैं। भाऊसाहेब पठान ने आरोप लगाया है कि इन पदों को भरने के बजाय सांसदों और विधायकों की कंपनियों पर मेहरबानी रखने के लिए आउटसोर्सिंग की जा रही है।
सरकारी खजाने की है लूट
निजी कंपनियां प्रति कर्मचारी न्यूनतम १८,००० रुपए लेती हैं, लेकिन वास्तविक कामगारों को ८,००० से १२,००० रुपए मिलते हैं, जबकि बाकी पैसा ठेकेदार की जेब में जाता है। इसके अलावा सफाई सेवाओं के लिए ठेकेदार कंपनियां सरकार से अलग से रकम वसूलती हैं। यह ठेका निजी कंपनियों पर मेहरबानी करने के लिए दिया जाता है। संगठन का आरोप है कि यह सरकारी खजाने की लूट है। कामगार संगठन का कहना है कि अगर निजी कंपनियों को ठेका देने के बजाय खाली पदों को भरा जाए तो सरकारी खजाने पर १७६ करोड़ रुपए का बोझ नहीं पड़ेगा।
ठेका के लिए केंद्र का ‘कारण’
कोविड काल के बाद अस्पतालों की साफ-सफाई पर फोकस है। राष्ट्रीय अस्पताल प्रदाता प्रत्यायन बोर्ड (एनएबीएच) द्वारा समय-समय पर जारी दिशानिर्देश स्वच्छता के लिए महत्वपूर्ण मानदंड निर्धारित करते हैं। चिकित्सा शिक्षा और औषधि विभाग के एक पत्र में कहा गया है कि अस्पताल को एनएबीएच के तहत अर्हता प्राप्त करने के लिए स्वच्छता के मामले में और अधिक कुशल बनाने का निर्णय लिया गया है।

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