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रुपए का रोना जारी! …डॉलर के मुकाबले ७८.३९ के स्तर पर हुआ बंद

• साल के अंत तक ८१ तक पहुंचने की आशंका
• २०२३ में लक्ष्य से ज्यादा हो सकता है राजकोषीय घाटा
सामना संवाददाता / मुंबई
केंद्र सरकार की गलत नीतियों के कारण हिंदुस्थानी अर्थव्यवस्था बिगड़ती जा रही है। परिणाम स्वरूप रुपया भी टूटता जा रहा है। कल भी रुपए का रोना जारी रहा। डॉलर के मुकाबले रुपए में गिरावट वर्षों से जारी है। २२ जून को यह गिरकर रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि रुपए में गिरावट जारी रह सकती है। जियोपॉलिटिकल टेंशन और सप्लाई चेन में दिक्कतों की वजह से रुपए पर दबाव बना रह सकता है। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि जब तक ऑयल और डॉलर में बड़ी गिरावट नहीं आती रुपए पर दबाव बना रहेगा। बैंक ऑफ अमेरिका सिक्योरिटीज ने रुपए के टारगेट में बदलाव किया है। उसने इस साल के अंत तक इसके ८१ के स्तर पर पहुंच जाने का अनुमान जताया है। पहले उसने साल के अंत तक इसके ७९ के स्तर तक जाने का अनुमान लगाया था। २२ जून (बुधवार) को डॉलर के मुकाबले रुपया ७८.१३ के स्तर पर खुला। फिर यह गिरकर ७८.२९ के स्तर पर आ गया। आखिर में यह ७८.३९ के स्तर पर बंद हुआ। मंगलवार को रुपया ७८.०८ के स्तर पर बंद हुआ था। इस साल अब तक रुपया ५ फीसदी गिर चुका है।
फॉरेन इनवेस्टर्स की बिकवाली है कारण
इसकी वजह शेयर बाजार में फॉरेन इनवेस्टर्स की बिकवाली है। उन्होंने इस साल अब तक २७.२२ अरब डॉलर के शेयर बेचे हैं। अगर पिछले ९ महीनों की बात करें तो उनकी बिकवाली करीब ३२ अरब डॉलर की रही है। इनपुट कॉस्ट से कंपनियों के मार्जिन में कमी आ सकती है।

बढ़ेगा घाटा
अर्थशास्त्रियों के अनुसार फूड और फ्यूल की वजह से रिटेल इनफ्लेशन टारगेट से ऊपर बना हुआ है। अच्छी बात यह है कि दक्षिणपूर्व मानसून २० जून तक सामान्य से सिर्फ ५ फीसदी कम रहा है। पिछले महीने यह सामान्य से ३० फीसदी कम था। कृषि आधारित राज्यों में एक समान बारिश होना बहुत अहम है। एक अर्थशास्त्री के अनुसार वित्त वर्ष २०२३ के दौरान राजकोषीय घाटा लक्ष्य से ज्यादा रह सकता है। इसकी वजह गैर-पूंजीगत खर्च में बढ़ोतरी है। सब्सिडी और दूसरी सामाजिक योजनाएं इसकी वजह हैं।

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