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जम्मू-कश्मीर में बॉर्डर टूरिज्म पर फिर से संशय के बादल छाने लगे… सीजफायर के उल्लंघन से बाज नहीं आ रही पाक सेना

सुरेश एस डुग्गर / जम्मू

राज्य में टूरिज्म को पलीता लगाने में पाक सेना की भी भूमिका फिर से अहम होती जा रही है, क्योंकि जहां कश्मीर के टूरिज्म को क्षति पहुंचाने की कोशिशें उसके पिठ्ठू आतंकियों द्वारा की जाती रही हैं तो सीमाओं पर फिर से सीजफायर का बार-बार उल्लंघन कर वह टूरिज्म विभाग की बॉर्डर टूरिज्म योजनाओं पर पानी फेर सकती है। ऐसा पहली बार नहीं है कि सीजफायर का उल्लंघन कर पाक सेना बॉर्डर टूरिज्म की योजनाओं को परवान चढ़ाने की कोशिशों का धक्का पहुंचा रही हो, बल्कि 2003 के नवंबर महीने से घोषित सीजफायर को उसने हमेशा ही दांव पर लगाया है।
ऐसे में सीमांत लोगों का कहना है कि सरकार को चाहिए कि पहले वह पाकिस्तान से बात करे और इस बात की गारंटी लो कि कुछ नहीं होगा, फिर पर्यटन ढांचों को पक्के तौर पर मजबूत की जाए। इतना जरूर था कि जम्मू संभाग के पर्यटन अधिकारी भी मानते हैं कि इस तरह की घटनाएं बॉर्डर टूरिज्म के लिए खतरा हैं। हालांकि, उनका कहना है कि इस तरह की घटनाएं रोज नहीं होती हैं। बॉर्डर टूरिज्म की योजना एक लंबी सोच को लेकर बनाई गई है, जिसके लिए इन चीजों को नजरअंदाज करना ही पड़ेगा।
पर यह सच है कि चाहे वह सांबा सेक्टर हो, अखनूर का कान्हा चक हो या फिर रणवीर सिंह पुरा या फिर अरनिया सेक्टर। अतीत में कई बार यहां पर तारबंदी काटकर घुसपैठ की कोशिश की गई। आज भी पाक सेना की गोलीबारी में रामगढ़ सेक्टर में बीएसएफ का एक जवान शहीद हो गया। दस दिन पहले पाक गोलों की बरसात ने कई घरों को जबरदस्त क्षति पहुंचाई थी। जम्मू सीमा पर लगातार पाक की ओर से घुसपैठ कराने की कोशिशें की जा रही हैं। पहले भी जम्मू सीमा पर होने वाली आतंकी घटनाएं परेशानी का सबब बनती रही हैं।
इन घटनाओं से साबित होता है कि टूरिज्म विभाग के लिए बॉर्डर टूरिज्म को बढ़ावा देना टेढ़ी खीर जैसा है। बॉर्डर के लोगों से जब यह सवाल पूछा गया कि क्या बॉर्डर टूरिज्म पर इसका असर पड़ेगा, तो कोई ना न कह सका। वे कहते हैं कि जब भी कभी सीजफायर की उल्लंघना होती है तो काफी सख्ती कर दी जाती है। अगर ऐसा ही माहौल रहा तो टूरिस्ट यहां पर कैसे आएंगे। ऐसा भी नहीं है कि टूरिस्ट सुचेतगढ़ में रिट्रिट सेरेमनी को देखने न आ रहे हों, पर अब बीएसएफ खुद सीजफायर उल्लंघन की घटनाओं से आने वाले टूरिस्टों की सुरक्षा को लेकर चिंतित होने लगी है।
प्रदेश टूरिज्म विभाग ने बॉर्डर टूरिज्म के रूप में सांबा सेक्टर के चमलियाल गांव को बार्डर टूरिज्म विलेज बनाने की योजना पर अमल किया। काम भी लगभग पूरा हो गया है। इसी तरह से विभाग ने सुचेतगढ़ को भी बॉर्डर विलेज बनाने दिया है।, पर पिछले कुछ समय से इंटरनेशनल बॉर्डर पर लगातार जो सीजफायर का उल्लंघन हो रहा है उस कारण बॉर्डर टूरिज्म की अन्य योजनाओं पर आशंका पैदा होने लगी है।
हालांकि, सुरक्षा एजेंसियां एवं टूरिज्म विभाग नहीं मानता कि इससे बॉर्डर टूरिज्म पर कोई असर पड़ेगा, लेकिन इतिहास गवाह रहा है कि बॉर्डर पर तनाव होने पर आस-पास के गांवों से लोग पलान कर जाते हैं। बॉर्डर पर लोगों की आवाजाही बंद कर दी जाती है। यही नहीं बॉर्डर पर शाम 6 बजे के बाद किसी को अपने खेतों में आने तक नहीं दिया जाता, पर इसके बावजूद टूरिस्टों के कदम सुचेतगढ़ की ओर मुड़ ही जाते हैं, जिन्हें अब टूरिज्म विभाग बॉर्डर के अन्य सेक्टरों की ओर मोड़ना चाहता है।

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