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सीएनजी का सेंसेक्स! १८ महीने में लगा ८० % का झटका!

  • टैक्सी एसोसिएशन ने की दाम घटाने की मांग
  • चालकों ने दी सरकार को अंदोलन की चेतावनी
  •  विकल्प पर विचार करने की सलाह भी दी

सामना संवाददाता / मुंबई
महंगाई तो वैसे भी आम जनता का जीना दूभर कर रखा है, इसी महंगाई में तमाम किल्लतों भरी जिंदगी में गुजर-बसर कर रहे टैक्सी-ऑटोचालकों की हालत इन दिनों सीएनजी गैस की बढ़ती कीमतों को लेकर बद से बदतर होती जा रही है। सरकार ने भी इन पर अन्याय ही किया है। इनके साथ सीएनजी वाले आम वाहनधारक भी अब खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। एक तरफ सरकार सीएनजी को पर्यावरण पूरक सस्ता बताकर सीएनजी वाहनों की वकालत कर रही है, वहीं दूरी तरफ सीएनजी की कीमतों को पेट्रोल के पास पहुंचा दिया है। पिछले १८ महीने में सीएनजी की कीमतों में लगभग ८० प्रतिशत की वृद्धि की गई है। इन १८ महीनों में गैस की कीमतों में वृद्धि के ६ शॉट मारे गए और अंतत: वर्ष २०२१ फरवरी में जिस सीएनजी गैस की प्रति किलो कीमत ४७ रुपए कुछ पैसे हुआ करती थी, वह अब अगस्त २०२२ में बढ़कर ८६ रुपए हो गई है।
खपत बढ़ी और दाम भी बढ़े
सरकार ने सीएनजी गैस पर चलनेवाले वाहनों की बिक्री को पहले खूब बढ़ावा दिया। पर्यावरण पूरक और सस्ता बताते हुए लोगों को सीएमजी वाहनों की तरफ आकर्षित किया। इतना ही नहीं लोगों ने भी इसमें खूब रुचि ली। डेढ़ साल पहले जहां १७ मिलियन घनमीटर गैस रोजना खपत होती थी, वहीं अब २७.७८ मिलियन घनमीटर गैस रोजना खप रही है। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि सीएनजी के वाहनों की संख्या कितनी बढ़ी है। लगभग ४३ प्रतिशत की रफ्तार से सीएनजी वेहिकल धारकों को संख्या बढ़ रही है। कंपनियां तो लोगों को सीएनजी-पेट्रोल से सस्ता बताकर सीएनजी गाड़ियां बेच रही हैं। उधर, टैक्सी, ऑटो और ओला-उबर जैसे ९८ प्रतिशत से ज्यादा वाहन सीएनजी पर आधारित हैं। ऐसे में सीएनजी की कीमतों में डेढ़ वर्ष में ८० प्रतिशत उछाल लोगों को परेशान कर दिया है।
जान पर आई है दर वृद्धि
टैक्सी, ऑटो चालक तो जी भरकर सरकार पर गुस्सा दिखा रहे हैं। अंटॉप हिल टैक्सी असोसिएशन के अध्यक्ष नंदलाल पांडे ने कहा कि मौजूदा समय में हमारे जेब में दिनभर कमाई के बाद डेढ़ से दो सौ रुपए ही बचते हैं। इस महंगाई में हमें घर चलाना, बच्चों का पालन-पोषण बहुत मुश्किल है। इस बीच आरटीओ की फाइन ने तो हमें बेहाल कर रखा है। एक अन्य ड्राइवर ने बताया कि सीएनजी पेट्रोल से जरूर सस्ता है लेकिन वाहनों के मेंटेनेंस करने में ही हम त्रस्त हो जाते हैं। पेट्रोल वाहनों की तुलना में सीएनजी वाहनों में काम ज्यादा निकलता है। ऐसे में महंगी सीएनजी का असर हमारे जेब पर भारी पड़ रही है।
कब कितनी बढ़ी सीएनजी की कीमतें
महीना दर वृद्धि
फरवरी २०२१ ४७.९०` १.५०`
अप्रैल २०२१ ४९.४०` २२.६०`
अप्रैल २०२२ ७२ ` ४ `
मई २०२२ ७६ ` ४ `
जुलाई २०२२ ८० `. ६ `
अगस्त २०२२ ८६ ` –

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