मुख्यपृष्ठनमस्ते सामना"रंग  बिरंगी  ज़िंदगी"

“रंग  बिरंगी  ज़िंदगी”

ज़िंदगी एक – रंग अनेक
कभी खट्टी, कभी मीठी
कभी फीकी, कभी नमकीन
कभी पल पल अर्थपूर्ण,
कभी अर्थहीन-दिशाहीन।
कभी चटकीली, कभी रंगीली
कभी हर्षित, कभी उदासीन,
कभी पल-पल खुशियों भरा,
कभी समस्या गमगीन।
कभी ‘सट्टा’ है ज़िंदगी,
तो कभी ‘इबादत’ है ज़िंदगी!
कहीं ‘कत्लेआम’ कहीं ‘शहादत’ कभी चिरपरिचित घिसी-पिटी, तो कभी नवीनतम ताज़गी लिए है ज़िंदगी
कभी चुस्त-फुर्तीली, कभी शिथिल, थकी-मॉंदी ‘नीरस ज़िंदगी।’

विचित्र अंकों का खेल है जिंदगी।
कहीं ये रास्ता, कहीं स्वयं ये मंजिल है।
कहीं ये ‘उफनता तूफान’
कहीं ये ‘सुरक्षित साहिल।’
कभी प्रभाती चमचमाती किरणें, कभी ये  निशा की ‘नशीली    चांदनी’
कभी ये ध्रुव¿कभी निषाद ज़िंदगी कभी ये यह तरह तरह के सवाल,
कभी खुद ही अपना जवाब है ज़िंदगी ‌
जोग, वियोग, कभी संजोग
यही इलाज, यही है रोग?
कई पहलू, कई रंगों से सराबोर है हमारी जिंदगी
कई नए, कई घोर पुराने
पहलू हैं ज़िंदगी के
कितने ही गिनवा दिए ‘नैंसी’ तूने
कितने फिर भी रह ही गए हैं अनकहे।
दरसल कोई नहीं उतार पाया है शब्दों में “रंग-बिरंगी ज़िंदगी” की असलियत को।
  नैंसी कौर, नई दिल्ली

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