मुख्यपृष्ठधर्म विशेषनकारात्मक ऊर्जा का नाश करते हैं रंग!

नकारात्मक ऊर्जा का नाश करते हैं रंग!

ज्योतिषाचार्य पं.अतुल शास्त्री। रंग पंचमी का उत्सव चैत्र माह के कृष्ण पंचमी के दिन मनाया जाता है। इस पर्व के उपलक्ष्य पर देशभर में कई तरह के धार्मिक और रंगारंग कार्यक्रम संपन्न होते हैं। अपने नाम के अनुरूप ये पर्व रंगों की महत्ता को दर्शाता है। इस दिन रंगों से लोग खेलते हैं। एक दूसरे पर रंग उड़ाते हैं। जीवन में हर रंग और सुंदरता के आगमन की कामना करते हैं। चैत्र मास में मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण त्योहार है। हिंदू पंचांग के अनुसार पंचमी तिथि का ये पर्व बहुत से रहस्यों को अपने में समेटे हुए होता है। रंगों के दिन लोग अपनी कटुता को भूल कर एक दूसरे के साथ प्रेम से मिलते है। आज के दिन मित्रता की जाती है। एक दूसरे को रंगने और गाने-बजाने का दौर चलता है।
होली के पांचवें दिन रंग पंचमी
रंग पंचमी पर्व का संबंध होली के साथ ही बहुत ही गहराई से जुड़ा हुआ है। होली की ही तरह रंगपंचमी के दिन भी एक दूसरे के साथ रंग खेला जाता है। होली के पांचवें दिन रंग पंचमी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन लोग भगवान श्री कृष्ण और राधा जी का पूजन करते हैं। इस पूजन में भगवान के साथ रंग खेला जाता है। राधा-कृष्ण जी को गुलाल और अबीर लगाया जाता है। होली की भांति रंगों से भरा यह त्योहार मुख्य रूप से मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र में बहुत ही उत्साह के साथ मनाया जाता है। रंग पंचमी की धूम हर तरफ दिखाई देती है। इस पर्व के अवसर पर बहुत से पकवान बनाए जाते हैं, जिन्हें भोग स्वरूप भगवान को अर्पित किया जाता है। धूम-धाम से मनाए जानेवाले इस उत्सव को सभी लोग मनाते हैं।
मुहूर्त
इस बार रंग पंचमी का त्योहार २२ मार्च २०२२ को मंगलवार के दिन मनाया जाएगा। रंग पंचमी को होली महोत्सव का समापन भी माना जाता है।
पंचमी तिथि प्रारंभ- २१ मार्च, २०२२ सुबह ०६.२४ बजे से
पंचमी तिथि समाप्त- २२ मार्च, २०२२ सुबह २८.२१ बजे तक
भगवान के साथ खेली जाती है होली
रंग पंचमी का दिन भगवान को समर्पित होता है। इस दिन भक्त भगवान के साथ रंग खेलते हैं। रंगों की होली का उत्सव विशेष रूप से मनाया जाता है। देवी-देवताओं को समर्पित ये पर्व एक विशेष दिन होता है। इस दिन भगवान पर अबीर और गुलाल भेंट करने से मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इस दिन रंगों का उपयोग सभी प्रकार की नकारात्मकता को दूर करने में बहुत उपयोगी होता है। इस दिन हर तरफ का माहौल भक्तिमय होता है। रंगों में डूबा हुआ वातावरण और उड़ने वाले रंग को लेकर भी बहुत सी मान्यताओं से इसकी महत्ता स्पष्ट होती है। माना जाता है कि गुलाल-अबीर, रंग व्यक्ति को भीतर से प्रसन्न कर देते हैं। इन रंगों द्वारा लोगों की नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है। राग-रंग का यह पर्व संगीत और रंग का प्रमुख अंग है। प्रकृति भी इस समय रंग-बिरंगे कलेवर के साथ चरम अवस्था पर होती है। इस दिन रंग उड़ाया जाता है। पारंपरिक गानों का प्रारंभ होता है। बाग-बागीचों में फूलों की आकर्षक छटा हर तरफ छाई होती है। पेड़-पौधे, पशु-पक्षी और मनुष्य सब उल्लास से परिपूर्ण होते हैं। ढोल-मंजीरों की धुन के साथ नृत्य-संगीत व रंगों में सभी लोग डूबे होते है। चारों तरफ रंगों की फुहार होती है। भगवान भी आसमान में रंगों के जरिए अपने भक्तों को आशीर्वाद देते हैं। इस दिन व्रत रखने और पूजा- पाठ करने से भगवान का आशीर्वाद प्राप्त होता है। भगवान अपने भक्तों को आशीर्वाद प्रदान करते हैं। रंग पंचमी के दिन व्रत रखने से बड़े दोष मिटाए जा सकते हैं।

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