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कॉलम ३ : बाहर आने लगा ५० प्रतिशत का पाप! … खुल गई कमीशनखोर सरकार की पोल

श्रीकिशोर शाही

मध्य प्रदेश में इन दिनों ५० प्रतिशत कमीशन को लेकर सियासी घमासान मचा हुआ है। इस मामले में कांग्रेस पूरी तरह से आक्रामक है और रोज शिवराज सरकार की कलई खोल रही है। इस कारण ‘मामा’ यानी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पूरी तरह से डिफेंसिव मोड में हैं। अभी कुछ दिन पहले ही शिवराज सरकार ने कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी द्वारा इस मामले को उठाए जाने के बाद उनके खिलाफ थोक में एफआईआर कराए हैं। प्रदेश भाजपा के नेता बार-बार यही बयान दे रहे हैं कि यह सब राज्य सरकार को बदनाम करने के लिए किया जा रहा है। मगर अब इस ५० प्रतिशत कमीशन का पाप बाहर आने लगा है। एक ठेकेदार ने ‘मामा’ की पोल खोल दी है।
मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव मुहाने पर है और इससे ठीक पहले राज्य में कमीशन के हंगामे ने राज्य के सियासी माहौल को गरमा दिया है। अब ५० फीसदी कमीशन मांगने का आरोप लगाते हुए एक ठेकेदार ने परिवार के साथ भोपाल में मुख्यमंत्री आवास के पास धरना देने पहुंच गया। इसके बाद कांग्रेस एक बार फिर सरकार पर हमलावर हो गई है।
कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव ने ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर ठेकेदार और उसकी पत्नी के धरने का वीडियो साझा करते हुए लिखा, ‘५० फीसदी कमीशनखोर सरकार से सब परेशान हैं। अब ग्वालियर के रहने वाले संजय मिश्रा, जो खुद पीडब्ल्यूडी के ठेकेदार हैं, भुगतान न होने की वजह से मुख्यमंत्री निवास के बाहर परिजनों के साथ धरने पर बैठे हैं और जल्द से जल्द भुगतान करने की गुहार शिवराज सिंह चौहान से लगा रहे हैं।’
ठेकेदार के धरने पर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व सीएम कमलनाथ ने ट्वीट कर कहा है कि ‘मध्य प्रदेश में चल रहा ५० प्रतिशत कमीशन राज अब सभी हदें पार कर गया है। ग्वालियर के एक ठेकेदार आज मुख्यमंत्री आवास के बाहर अपनी पत्नी सहित धरने पर बैठे हैं और उन्होंने आत्महत्या करने की चेतावनी तक दी है। उनका सीधा कहना है कि ५० प्रतिशत कमीशन मांगे जाने के कारण वह पूरी तरह बर्बाद हो गए हैं। बार-बार आग्रह करने के बावजूद न तो कोई अधिकारी और न ही मुख्यमंत्री उनकी बात सुन रहे हैं। कमलनाथ ने कहा, ‘यह पहला मामला नहीं है, इससे पहले ग्वालियर के ही एक ठेकेदार ने उच्च न्यायालय को पत्र लिखकर ५० प्रतिशत कमीशन का आरोप लगाया था। लेकिन उस व्यक्ति को न्याय दिलाने की जगह आवाज उठाने वालों के खिलाफ शिवराज सरकार सक्रिय हुई। उसके बाद रीवा के एक ठेकेदार ने गौशाला निर्माण में ५० प्रतिशत कमीशन का आरोप लगाया। उस मामले पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। राज्य की स्थिति का जिक्र करते हुए कमलनाथ ने कहा कि मैं देख रहा हूं कि शिवराज सरकार ने इसी तरह से व्यापम घोटाले में अपराधियों को संरक्षण दिया था और तब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई थी, जब तक करीब ५० निर्दोष लोगों की संदिग्ध मृत्यु नहीं हो गई और सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप नहीं किया। उन्होंने कहा कि ५० प्रतिशत कमीशन राज प्रदेश के ईमानदार ठेकेदारों और अधिकारियों के लिए जानलेवा संकट बनता जा रहा है। जो मुख्यमंत्री अपने दरवाजे पर आए हुए व्यक्ति की फरियाद नहीं सुन सकता, उससे हम न्याय की क्या उम्मीद रखें? कमलनाथ की यह बात इस बात का संकेत है कि प्रदेश में माहौल बदल रहा है और शिवराज की कुर्सी इस बार जानेवाली है।
(लेखक पत्रकार एवं स्तंभकार हैं।)

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