मुख्यपृष्ठस्तंभकॉलम ३: भिक्षावृति के अंधेरे में गुम होता बचपन!

कॉलम ३: भिक्षावृति के अंधेरे में गुम होता बचपन!

डॉ. रमेश ठाकुर

भिक्षावृति की समस्या पूरे देश में बढ़ती जा रही है। नए आंकड़े भयभीत करते हैं। वेंâद्र व राज्यों की हुवूâमतें अच्छे से जानती हैं कि इस समस्या के पीछे बड़ा संगठित गिरोह है, जो भीख मंगवाते हैं। कई राज्यों में समय-समय पर भिक्षावृत्ति पर प्रतिबंध लगाया जाता है, इसके बावजूद समस्या थमने के बजाय बढ़ रही है। कुछ समय पहले राजस्थान सरकार ने भिक्षा मांगने पर बैन लगाया था। खलबली मची तो वहां के भिखारियों ने दिल्ली, हरियाणा व मध्य प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों का रुख किया। उनको पता है, कुछ समय तक सरकारी सख्तियां रहेंगी, बाद में स्थिति सामान्य हो जाएगी, फिर वापस चले जाएंगे। दिल्ली में भी केजरीवाल ने विगत दो वर्ष पूर्व कमोबेश कुछ ऐसा ही आदेश निकाला था, जो कुछ महीनों में अप्रभावी हो गया। आज स्थिति ये है कि दिल्ली के प्रत्येक क्षेत्रों में आपको भिखारी भीख मांगते मिल जाएंगे, जिनमें बच्चों की संख्या आपको ज्यादा दिखेगी। बच्चों के हाथों में गुब्बारे, पेंसिल आदि खिलौने दिखेंगे। एक बारगी देखने में ऐसा प्रतीक होगा, ये बच्चे सामान बेच रहे हैं, जबकि वह भीख मांगने का सहारा मात्र होता है।
बच्चे अपनी मर्जी से भीख नहीं मांगते। बल्कि वो संगठित भीख माफिया के हाथों की कठपुतली होते हैं। बिहार, महाराष्ट्र, पंजाब, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, दिल्ली और ओडिशा में भीख मांगने वाले बच्चों की संख्या विगत कुछ वर्षों से ज्यादा बढ़ी है। ये अधिकांश बच्चे गुमशुदा वैâटगरी के होते हैं। चाइल्ड ट्रैफिकिंग के शिकार होते हैं। इन बच्चों के हाथों में स्वूâली किताबों की जगह भीख का कटोरा देखकर कलेजा कांप उठता है। हाल में गुमशुदा बच्चों पर केंद्र सरकार ने जनवरी २०२० से लेकर ३१ दिसंबर २०२२ तक का आंकड़ा प्रस्तुत किया, जिसमें अव्वल नंबर पर मध्य प्रदेश है, जहां से ३२,९७६ बच्चे गायब हुए, लेकिन अच्छी बात ये है कि उनमें ज्यादा बच्चे खोज लिए गए, वहीं दूसरे नंबर पर प. बंगाल है। आंकड़ों की मानें तो २७,१३३ बच्चे गायब हुए, जिनमें २४,६०३ बच्चे मिले, बाकियों का कोई अता-पता नहीं? इसके अलावा कर्नाटक, गुजरात, यूपी, ओडिशा, दिल्ली, राजस्थान, महाराष्ट्र, बिहार, झारखंड आदि राज्यों से भी बच्चे हजारों की संख्या में लापता हुए। गायब हुए बच्चों का कुल आंकड़ा पिछले तीन सालों में १,४६,३१६ है, जिनमें १,२८,६६७ बच्चे ही खोजे गए, बाकी बच्चों की खोज अभी भी जारी है। अनुमान है कि ये सभी बच्चे भीख माफियाओं के चंगुल में पंâसकर भीख मांगने के काम में लगे हैं।
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने लापता हुए बच्चों को सर्च करने के लिए एक ‘चाइल्ड ट्रैक पोर्टल’ तैयार किया है, जिसमें उन बच्चों के संबंध में संपूर्ण जानकारियां बताई गई हैं, जो या तो बिछड़ गए या फिर अचानक गायब हुए। इस पोर्टल और तमाम आधुनिक तकनीकों से बच्चों को खोजना अब पहले के मुकाबले आसान हुआ है। सरकारी सख्ती के साथ-साथ सामाजिक स्तर पर भी इस समस्या के प्रति चेतना होगा। जब तक सामूहिक चेतना और सतर्वâता नहीं बढ़ेगी, तब तक ये सिलसिला यूं ही चलता रहेगा। हमें सड़क पर भीख मांगने वाले बच्चों से बात करनी चाहिए और पूछना चाहिए कि क्या वो इस काम में अपनी मर्जी से आए हैं? अगर आपको जरा भी संदेह हो तो तुरंत रिपोर्ट करें। ऐसा करके हम एक जिम्मेदार नागरिक होने का कर्तव्य भी निभाएंगे।

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