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कॉलम ३ : जम्मू कश्मीर में नए जंग के मैदान, टोल और मीटर

सुरेश एस डुग्गर जम्मू
उत्तर से दक्षिण की ओर अर्थात कश्मीर से जम्मू की ओर तेजी से बढ़ते आतंकवाद के बीच प्रदेश में दो नए मुद्दे जंग के मैदान के रूप में प्रशासन को परेशान किए हुए हैं। इनमें से एक स्मार्ट मीटर और दूसरा है सरोर टोल प्लाजा। समार्ट मीटर के विरुद्ध छेड़ी गई जंग में प्रदेश का प्रत्येक कस्बा अपनी आहुति डाल रहा है, तो जम्मू के सांबा जिले में सरोर टोल प्लाजा भाजपा की जम्मू संभाग में चूलें हिलाने का काम कर रहा है।
कश्मीर में एलओसी के आखिरी गांव से लेकर पंजाब से सटे लखनपुर तक की जनता प्रतिदिन सड़कों पर उतर रही है। करीब चार माह से जारी यह आंदोलन उन प्रीपेड और स्मार्ट मीटरों के खिलाफ है, जिनके प्रति लोगों का आरोप है कि इन्होंने उनके घरों का बजट हिलाकर रख दिया है।
हालांकि, बिजली विभाग अब बचाव में उतरा है और स्मार्ट मीटर की शिकायतों के लिए नोडल ऑफिसर तैनात किए हैं, पर उन गांवों में भीषण गर्मी के बीच लोगों को बिना बिजली के इसलिए जीना पड़ रहा है, क्योंकि विभाग उन इलाकों में कई दिनों से बिजली आपूर्ति ही नहीं कर रहा था, जहां इनका विरोध हो रहा था और लोग मीटर नहीं लगाने दे रहे थे। यह बात अलग है कि अब विभाग मजिस्ट्रेट की निगरानी में पुलिस के बल पर मीटरों को लगा रहा है।
प्रदेश में दूसरा जंग का मैदान नया तो नहीं है पर अब सभी राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक दल इसमें कूद पड़े हैं, सिवाय भाजपा के। यह मामला सांबा जिले में सरोर टोल प्लाजा का है। इसका विरोध करने वाले कई तर्क देते हैं। पहला यह कि ये सरकारी नीति के अनुरूप नहीं है और ४० किमी के बीच ही दो टोल हैं तथा दूसरा नेशनल हाईवे का कार्य कई वर्षों से चल रहा है और सड़क की हालत ऐसी नहीं है कि कोई मन से टोल भरे।
अब यह आंदोलन हिंसक रूप भी लेने लगा है। आए दिन लाठीचार्ज, आंसू गैस और पथराव की घटनाओं के बाद धारा १४४ लगा राजपूत सभा के २५ सदस्यों को जेल में भी ठूंस दिया गया है, जो अब जेल में ही भूख हड़ताल पर हैं और नेशनल हाईवे अथॉरिटी का साफ कहना है कि टोल नहीं हटेगा।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और स्तभकार हैं।)

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