मुख्यपृष्ठस्तंभकाॅलम 3 : अब वाराणसी हवाई अड्डे की बारी!

काॅलम 3 : अब वाराणसी हवाई अड्डे की बारी!

विनयकुमार पांडेय
राज्य के वाराणसी में लालबहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के विस्तारीकरण के साथ उसके निजीकरण की भी तैयारी है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय नीलामी का मसौदा तैयार कर रहा है। इस तरह की खबरें आ रही हैं कि अगले साल जून तक कार्रवाई शुरू हो जाएगी। यदि सब कुछ ऐसा ही हुआ तो बाबतपुर उत्तर प्रदेश का दूसरा निजी एयरपोर्ट होगा। वर्तमान में लखनऊ एयरपोर्ट का संचालन अडानी समूह कर रहा है।
केंद्र सरकार ने देश के सभी एयरपोर्ट के विकास के लिए २०५० तक का विजन तय किया है। मंशा है कि हवाईअड्डे से आवागमन के साथ-साथ निर्यात को बढ़ावा दिया जाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र के एयरपोर्ट को यात्रा और सुविधाओं की दृष्टि से अंतर्राष्ट्रीय मानकों के हिसाब से तैयार किया जाएगा, जिसमें अडानी की भूमिका भी तय होगी। हालांकि, निजीकरण के प्रस्ताव से अनभिज्ञता जताते हुए एयरपोर्ट निदेशक पुनीत गुप्ता दावा करते हैं कि एयरपोर्ट पर सुविधाएं बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार का जो भी आदेश या प्रस्ताव आएगा, उसका पालन होगा।
नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एयरपोर्ट के ११७ हेक्टेयर (३५० एकड़) तक विस्तारीकरण पर काम शुरू कर दिया है। उसमें दो किमी लंबा रनवे, एक अन्य टर्मिनल सहित विभिन्न सुविधाएं विकसित होनी हैं। विस्तारीकरण के लिए जमीन अधिग्रहण की जिम्मेदारी प्रदेश सरकार ने ली है। योगी सरकार ने जमीन खरीदने के लिए ५५० करोड़ जारी भी कर दिया है। अधिग्रहण की नोडल अधिकारी और एसडीएम पिंडरा प्रतिभा मिश्रा कहती हैं कि २० हेक्टेयर जमीन खरीदी जा चुकी है। उस पर १६६ करोड़ खर्च हुए हैं। उन्होंने बताया कि दिसंबर में ६० से ७० फीसदी जमीन ले ली जाएगी।
दावा किया जा रहा है कि विस्तारीकरण परियोजना के तहत बाबतपुर एयरपोर्ट से अंतर्राष्ट्रीय उड़ानें बढ़ेंगी। न केवल अरब देश बल्कि यूरोपीय देशों तक बनारस से विमान संचालित करने का लक्ष्य है ताकि वाराणसी के जरिए पूरे प्रदेश को जोड़ा जा सके। पूर्वांचल घरेलू व स्थानीय उत्पादों की सम्पन्नता वाला क्षेत्र है। दूर देशों तक उत्पादों की पहुंच आसान बनाने में यह बड़ा कदम होगा। परंतु सवाल यह है कि यह सभी कुछ करने के लिए केवल देश में एक ही नाम शेष रह गया है क्या? या इसके पीछे की मंशा कुछ और है।

अन्य समाचार