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१४ हजार शौचालयों का टेंडर निकालने का आयुक्त को आदेश, एक और घोटाले की तैयारी! पालक मंत्री के पत्र से मनपा में हंगामा

रामदिनेश यादव / मुंबई
मनपा में इन दिनों घोटालों का दौर शुरू है। आए दिन नए-नए घोटाले सामने आ रहे हैं। स्ट्रीट फर्नीचर, ब्यूटीफिकेशन, सड़क कंक्रीटीकरण जैसे तमाम घोटालों के बाद अब एक और घोटाला करने की तैयारी शिंदे सरकार के पालक मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने की है। ऐसा आरोप मनपा में पूर्व नगरसेवकों ने लगाया है। दरअसल, मंगल प्रभात लोढ़ा में मनपा आयुक्त इकबाल सिंह चहल को पत्र लिखकर कहा है कि मुंबई में १४,००० शौचालयों के निर्माण के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू करें। सीएसआर फंड के समानांतर निजी फंड से काम शुरू करें। मंत्री लोढ़ा के इस पत्र को लेकर मनपा में बवाल मच गया है। पूर्व नगरसेवकों ने इसका विरोध किया है।
मुंबई के विभिन्न हिस्सों में शौचालयों का निर्माण मनपा कर रही है और मनपा का दावा है कि अब तक `लॉट ११’ पूरा हो चुका है। अब `लॉट १२’ परियोजना में १४,००० शौचालयों का निर्माण किया जाएगा और इसकी निविदा प्रक्रिया अंतिम चरण में है। मनपा इसका निर्णय निजी फर्म कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (सीएसआर फंड) के तहत कराने की योजना पर काम कर रही है, लेकिन इसकी निविदा प्रक्रिया रोक दी गई थी। अब पालक मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने मनपा आयुक्त को पत्र लिखा है कि इन शौचालयों के निर्माण के लिए सीएसआर फंड नहीं, मनपा अपने खर्च से बनाए। लोढ़ा ने कहा कि सीएसआर फंड से इसके निर्माण में काफी समय लगेगा। इतना इंतजार नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि शौचालय निर्माण की प्रक्रिया को लागू कर शौचालयों का निर्माण स्वयं करना चाहिए।
आयुक्त के अधिकारों में बाधा
रवि राजा ने कहा कि मनपा आयुक्त के अधिकारों में बाधा प्रकट की जा रही है। मनपा के निर्णय में राज्य सरकार के मंत्री हस्तक्षेप कर मनपा को कहीं न कहीं नुकसान पहुंचा रहे हैं। मनपा में पूर्व नगरसेवक सचिन पडवल ने कहा कि यह एक नए घोटाले की तैयारी दर्शा रहा है। ये योजना जनता के लिए जरूरी है,॰य लेकिन इस काम में निधि को लेकर अभी तक कोई फैसला नहीं किया गया है। बेशक इसके बजट को बढ़ाकर इसमें घोटाले शुरू होंगे।
सरकार के मंत्रियों का हस्तक्षेप
मंत्री लोढ़ा के इस पत्र को लेकर मनपा में बवाल मच गया है। शिवसेना के पूर्व नगरसेवक जहां इसे भ्रष्टाचार की नई तैयारी बता रहे हैं, वहीं मनपा में पूर्व विपक्ष नेता रविराजा ने कहा कि मनपा आयुक्त के हर निर्णय में राज्य सरकार के मंत्रियों का हस्तक्षेप गलत है। मनपा स्वतंत्र बॉडी है, उसे स्वतंत्रता से काम करने का अधिकार है। लेकिन यहां राज्य सरकार उसके अधिकारों का हनन कर रही है।

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