मुख्यपृष्ठसमाचारअनुकंपा पर नौकरी अपवाद!...पुलिस जवान की मौत पर हाईकोर्ट का बयान

अनुकंपा पर नौकरी अपवाद!…पुलिस जवान की मौत पर हाईकोर्ट का बयान

सामना संवाददाता / चंडीगढ़ । पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने साफ किया है कि अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति पाने का एक जरिया नहीं माना जा सकता। यह सिर्फ एक अपवाद है। हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी हरियाणा पुलिस के एक जवान की मौत के १२ साल बाद बेटे द्वारा अनुकंपा के आधार पर नौकरी की मांग संबंधी अपील पर की। हाईकोर्ट ने युवक की अपील को रद्द कर दिया। सिंगल बेंच के पैâसले को चुनौती देते हुए यह अपीलीय केस दायर किया गया था। हाईकोर्ट जस्टिस जीएस संधावालिया और जस्टिस विकास सूरी की डबल बेंच ने अब मामले में पैâसला दिया है। बेंच ने कहा कि कर्मचारी की मौत १९९७ को हुई थी। उस समय अपीलकर्ता मात्र ७ साल का था। ऐसे में मृतक की पत्नी ने अपने लिए अनुकंपा के आधार पर नौकरी की मांग नहीं की। हाईकोर्ट ने कहा कि अनुमान लगाया जा सकता है कि परिवार दरिद्रता में नहीं होगा।
सरकार ने भी ठुकरा दी थी मांग
बता दें कि टिंकू अपने पिता की मौत के दौरान सिर्फ ७ साल का था। ऐसे में बालिग होने पर उसने जनवरी २००९ में अनुकंपा के आधार पर नौकरी की मांग की थी। १९९९ के सरकारी निर्देशों के आधार पर उसकी मांग को रद्द कर दिया गया था। उसमें कहा गया था कि आश्रित को उस स्थिति में नौकरी दी जा सकती है, यदि वह नाबालिग हो, मगर तीन साल के भीतर बालिग हो जाए। उसने सरकारी आदेशों को सिंगल बैंच में चुनौती दी थी।

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