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सरोकार: ५-ए के कारशेड पर सस्पेंस, तब कैसे होगा मेट्रो मेंटेनेंस? एमएमआरडीए ने किया ७३ प्रतिशत काम पूरा होने का दावा, रख-रखाव की व्यवस्था की रूपरेखा भी नहीं है तैयार

अभिषेक कुमार पाठक

मुंबई मेट्रो ५-ए (ठाणे-भिवंडी) के बीच चलने वाली मेट्रो का प्री-कॉस्ट स्ट्रक्चरल एलिमेंट तैयार कर दिया गया है, जिससे एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। हालांकि, मेट्रो संचालन से जरूरी है रखरखाव की व्यवस्था, जिसकी अभी तक कोई रूप रेखा तैयार नहीं की गई है। इस रूट के कार डिपो का निर्माण कार्य अभी तक शुरू ही नहीं हुआ है।
इस सप्ताह की शुरुआत में धामनकर नाका मेट्रो स्टेशन के लिए अंतिम प्लेटफॉर्म लेवल `एल’ बीम के निर्माण के साथ मुंबई मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) ने ११.८८ किमी लंबी ऑरेंज लाइन के साथ सभी छह स्टेशनों के लिए संपूर्ण निर्माण कार्य पूरा कर लिया। मेट्रो-५ के पहले चरण के छह स्टेशन बाल्कुम नाका, काशेली, काल्हेर, पूर्णा, अंजुरफाटा और धामनकर नाका हैं। कुल १,०९८ स्टेशन एलिमेंट बनाए गए थे, जिनमें स्पाइन, विंग्स, यू गर्डर्स, पिलर आर्म्स और एल बीम आदि जैसे अलग-अलग एलिमेंट शामिल थे। उन्हें खड़ा करने और लॉन्च करने के लिए ८० मीट्रिक टन से लेकर ५०० मीट्रिक टन क्षमता वाली क्रेन और पुलर हाइड्रोलिक एक्सल का उपयोग किया गया था।
इसके साथ ही इस कॉरिडोर के स्टेशन का ७३.३५ प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। साथ ही इस कॉरिडोर का ८०.५ प्रतिशत वायाडक्ट हिस्सा अब पूरा हो चुका है। ६ स्टेशनों सहित ११.८८ किमी में से ९.८७ किमी वायाडक्ट एलिवेटेड खंड का निर्माण कार्य पिलर्स के ऊपर कुल १,२१८ प्री कॉस्ट एलिमेंट को खड़ा करके पूरा किया गया है। इसमें पियर वैâप, यू गर्डर, आई गर्डर, बॉक्स गर्डर, पैरापेट वॉल आदि शामिल हैं।
डिपो कार्य में देरी
संपूर्ण मेट्रो-५ २४.९ की लंबाई किमी है और ठाणे-भिवंडी-कल्याण तक एलिवेटेड और भूमिगत कॉरिडोर का परफेक्ट कॉम्बिनेशन है। भिवंडी-कल्याण के बीच कॉरिडोर के शेष हिस्से में रास्ते के अधिकार से संबंधित चुनौतियां हैं इसलिए निर्माण कार्य शुरू करने में देरी हो रही है।
ध्वस्तीकरण से प्रभावित हुए लोग
एमएमआरडीए को निर्माण कार्य में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जिनका समाधान करने की आवश्यकता थी। टीम को धामनकर नाका मेट्रो स्टेशनों पर एल बीम निर्माण गतिविधि और सुरक्षित क्रेन संचालन में समस्या का सामना करना पड़ रहा था, जिसके लिए पुनर्वास आवश्यक था। एमएमआरडीए ने धामनकर नाका स्टेशन पर दो चरणों में ध्वस्तीकरण अभियान चलाया। परियोजना प्रभावित लोगों को एमयूटीपी नीति के अनुसार, निर्धारित समय में मुआवजा दिया गया। निर्माण कार्य में विभिन्न स्थानों पर हाई टेंशन लाइन और भारी यातायात के साथ समस्याओं का भी सामना करना पड़ा। कशेली में नियोजित कार डिपो में भूमि अधिग्रहण संबंधी चुनौतियां हैं और सिविल निर्माण के लिए भूमि अभी तक एमएमआरडीए को हस्तांतरित नहीं की गई है।

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