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सरोकार: कहां गई ‘रेड बस’ की छूट?

अभिषेक कुमार पाठक

एसटी प्राधिकरण को पता ही नहीं कि महिलाओं को छूट मिल भी रही है या नहीं

मैं अक्सर एसटी के लाल डिब्बे वाली बस से प्रवास करती हूं, जिसमें टिकट का किराया काफी कम होता है। वे लोग स्टॉप के आधार पर किराया लेते हैं। लेकिन ई-शिवनेरी में यात्रा करने वाले यात्रियों को यह सहूलियत नहीं मिलती है। वे लोग स्टॉप को केंद्र बिंदु में रखे बिना टिकट के पैसे ले रहे हैं। -गायत्री,यात्री

मुंबई को महाराष्ट्र के गांव-गांव को जोड़ने वाली एसटी बस `लाल परी’ नाम से प्रसिद्ध है। लेकिन समय के साथ-साथ एसटी के अलग-अलग रूप आने लगे हैं। कल मुख्यमंत्री द्वारा एसटी ३४ ई-बसों का उद्घाटन किया गया। लेकिन शिंदे सरकार एसटी की बुनियादी व्यवस्था को बेहतर बनाने में फेल नजर आ रही है। महाराष्ट्र स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (एमएसआरटीसी) की बसें लोगों को कम रेट में उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं और अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभाती भी हैं। लेकिन एमएसआरटीसी के साथ पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) पर काम करने वाली ई-शिवनेरी, शिवनेरी जैसी बसों से यात्रा करने वाले यात्री परेशान हैं। उनका मानना है कि ये बसें निर्धारित बस स्टॉप की टिकट देने की बजाय काफी दूर के बस स्टॉप की टिकट देते हैं। सवाल किए जाने पर भी यह कहा जाता है कि टिकट उस स्टॉप की ही मिलेगी। एक यात्री ने बताया कि उसने ई-शिवनेरी से यात्रा करने के लिए पुणे स्टेशन से नेरुल की टिकट मांगी, लेकिन उसे दादर की टिकट दी गई। उन्होंने जब सवाल किया तो उन्हें यह बताया गया कि आपको दादर तक का निर्धारित टिकट किराया भुगतान करना पड़ेगा। पुणे से नेरुल तक का किराया २२० रुपए (महिलाओं के लिए दी गई सहूलियत) होता है लेकिन महिला से २७५ रुपए लिए गए। लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि नेरुल से पुणे जाने के लिए यह किराया कम है। जाते समय किराया २२० रुपए ही लिया गया था। हमें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है -एसटी अधिकारी

एसटी के अधिकारी ने बताया कि ऐसा मामला अब तक सामने नहीं आया था। हमें इस बारे में जानकारी नहीं थी। इसलिए इस मामले को संज्ञान में नहीं लिया गया। सालों से यात्रियों को इस प्रकार से ही टिकट दिए जा रहे हैं, लेकिन अब तक किसी भी यात्रियों ने इसपर सवाल नहीं खड़ा किया और हमें इस संदर्भ में कोई कंप्लेन भी नहीं मिली। लेकिन अब हम कोशिश करेंगे कि इस मामले को संज्ञान में लिया जाए। अधिकारी ने पुणे मंडल से बात करने के बाद यह बताया कि टिकट की रकम पहले से ही इस प्रकार निर्धारित की गई है और यही वजह है कि यह रकम ली जा रही है। इस पैâसले पर आज तक किसी ने प्रश्न खड़ा नहीं किया था।
महाराष्ट्र सरकार ने एमएसआरटीसी की बसों में प्रवास करने वाली महिलाओं के लिए टिकट में ५० फीसदी की रियायत दी है। महिलाओं को यह लाभ ‘महिला सम्मान योजना’ के तहत दिया गया है। लेकिन यदि कोई महिला प्रवासी रेड बस से टिकट निकालना चाहे तो उन्हें ५० फीसदी रियायत की सुविधा नहीं मिलती है। एप पर उन्हें पूरा किराया भरना पड़ता है। हालांकि, एसटी एप पर यह सुविधा उपलब्ध है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि रेड बस एसटी में प्रवास करनेवाली महिलाओं को सुविधा नहीं देना चाहती है तो एसटी प्राधिकरण उन्हें टिकट बुकिंग के लिए अनुमति ही क्यों दे रहा है।

मात्र २ फीसदी लोगों ने चुना डिजिटल पेमेंट का विकल्प

एसटी ने लोगों की यात्रा को अधिक सुविधाजनक और डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए डिजिटल पेमेंट विकल्प प्रदान किया है। यूपीआई के माध्यम से टिकटिंग सिस्टम चालू किया गया है। लेकिन एसटी के अधिकतर कंडक्टर बुजुर्ग होने की वजह से टेक्नोसेवी नहीं हैं और इसका परिणाम डिजिटल पेमेंट पर पड़ रहा है। पूछे जाने पर भी कंडक्टर स्वैâन करने के लिए कोड नहीं देते हैं, जिसका नुकसान एसटी के यात्रियों को उठाना पड़ता है और प्राधिकरण को भी। बसों में पिछले तीन महीनों में केवल १,३८,३६४ यात्रियों ने डिजिटल टिकटिंग विकल्प का लाभ उठाया है।

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