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चाचा की बधाई या भतीजे पर निशाना : `कंस’ ने छल-बल से पिता का पद छीना! कृष्ण जन्माष्टमी पर शिवपाल का ‘गीता ज्ञान’

सामना संवाददाता / लखनऊ
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने यदुवंशियों को लेकर एक ओपन लेटर लिखा। शिवपाल ने गीता का उल्लेख करते हुए जन्माष्टमी की बधाई तो दी, इसके साथ ही इशारों-इशारों में एक बड़ा सियासी संदेश भी दे दिया। शिवपाल ने जो कुछ भी पत्र में लिखा है, उसे चाचा-भतीजे (शिवपाल यादव और अखिलेश यादव) के बीच तनातनी भी माना जा रहा है। हालांकि शिवपाल ने किसी के नाम का जिक्र नहीं किया है, लेकिन इसके मायने जरूर निकाले जा रहे हैं।
शिवपाल ने यह लेटर ‘ययाति सुत यदुवंशियों’ को लिखा है। लेटर में शिवपाल ने लिखा है, ‘समाज में जब कोई ‘कंस’ अपने पूज्य पिता को छल-बल से अपमानित कर पद से हटाकर अवैध तरीके से खुद को स्थापित करता है, तो धर्म की रक्षा के लिए मां यशोदा के लाल, ग्वालों के सखा योगेश्वर श्रीकृष्ण अवश्य अवतार लेते हैं। अपने योग माया से अत्याचारियों को दंड देकर धर्म की स्थापना करते हैं। शिवपाल के इस लेटर में ‘कंस’ और उसके द्वारा पिता का पद छीनने के जिक्र को समाजवादी पार्टी में हुए बदलाव से जोड़कर देखा जा रहा है।
इशारों-इशारों में बताया कंस
समाजवादी पार्टी की सियासत को समझने वाले सियासी जानकार इसे अखिलेश पर शिवपाल का तंज मान रहे हैं। शिवपाल ने जिस तरह कंस का जिक्र किया है, वैसी ही घटना समाजवादी पार्टी में हो चुकी है। साल २०१६-१७ में जब समाजवादी पार्टी के अंदर विवाद बढ़ा था, तब अखिलेश पिता मुलायम सिंह यादव को राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद से हटाकर खुद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए थे।कहा जा रहा है कि पत्र में शिवपाल ने इशारों-इशारों में ही उस घटना का जिक्र कृष्ण के जीवन के आधार पर किया है।
अखिलेश यादव पर साधा निशाना
बता दें कि २०१७ विधानसभा चुनाव के बाद ही शिवपाल यादव और अखिलेश यादव के बीच रिश्तों में दरार पड़ गई थी। बीच-बीच में दोनों के बीच खटास चर्चा में रही। २०२२ विधानसभा चुनाव के बाद चाचा-भतीजे का रिश्ता और तल्ख तब हो गया। तब समाजवादी पार्टी ने पत्र जारी कर कहा था कि शिवपाल पूरी तरह से स्वतंत्र हैं। वह किसी भी पार्टी में जा सकते हैं। इस पर शिवपाल ने कहा था कि मैं वैसे तो स्वतंत्र था, लेकिन समाजवादी पार्टी द्वारा पत्र जारी कर मुझे औपचारिक स्वतंत्रता देने हेतु बहुत-बहुत धन्यवाद। इसके बाद शिवपाल अपनी पार्टी को दोबारा से खड़े करने में जुटे हैं और उनका यह बयान उसी से जोड़कर देखा जा रहा है।

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