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विधान परिषद में कांग्रेस को पराजय का झटका! शिवसेना के सचिन अहिर, आमशा पाडवी पहले ही राउंड में जीते

  • राष्ट्रवादी दो, तो भाजपा पांच सीटों पर जीती, कांग्रेस को एक सीट
सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र विधानसभा की १० सीटों के लिए कल चुनाव संपन्न हुआ, जिसमें राज्य की सत्ताधारी महाविकास आघाड़ी में शामिल शिवसेना, राकांपा के २-२ तो कांग्रेस के एक उम्मीदवार को जीत मिली, वहीं दूसरी तरफ मुख्य विपक्षी दल भाजपा के ५ उम्मीदवार विजयी हुए। विधान परिषद की १० सीटों के लिए ११ उम्मीदवार मैदान में थे, इससे सभी राजनीतिक दलों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी थी। इस चुनाव में शिवसेना के सचिन अहिर और आमश्या पाडवी ये दो उम्मीदवार पहले ही राउंड में विजयी हुए तो वहीं राष्ट्रवादी के एकनाथ खडसे और रामराजे निंबालकर ने भी जीत के लिए अपेक्षित मतों का कोटा पूरा करते हुए पहले राउंड में बाजी मार ली। भाजपा के राम शिंदे, श्रीकांत भारतीय, उमा खापरे और प्रवीण दरेकर ने जीत के लिए आवश्यक मतों का कोटा पूरा करते हुए अपेक्षा से अच्छी जीत हासिल की। नौवीं और दसवीं सीट के लिए कांग्रेस के चंद्रकांत हंडोरे, भाई जगताप और प्रसाद लाड के बीच हुए दिलचस्प मुकाबले में कांग्रेस के चंद्रकांत हंडोरे पराजित हुए।
विधान परिषद की १० सीटों के लिए हुए मतदान में ११ उम्मीदवारों के मैदान में उतरने से चुनाव दिलचस्प हो गया। महाविकास आघाड़ी से शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस और कांग्रेस से प्रत्येक २-२ उम्मीदवार मिलाकर कुल ६ उम्मीदवार मैदान में थे। इस चुनाव में भाजपा के पास उपलब्ध संख्याबल का विचार करें तो भाजपा के ४ उम्मीदवारों की जीत निश्चित मानी जा रही थी परंतु भाजपा द्वारा ५वां उम्मीदवार मैदान में उतारे जाने से यह चुनाव बेहद दिलचस्प हो गया। चुनाव में बेहद करीबी मुकाबले में शिवसेना, राष्ट्रवादी के २-२ तो इसी तरह से भाजपा के ४ उम्मीदवार पहले ही दौर में जीत का अपेक्षित कोटा पूरा करते हुए विजयी हुए। कांग्रेस के २ उम्मीदवारों में से एक भी उम्मीदवार पहले राउंड में जीत के लिए जरूरी मतों का कोटा पूरा नहीं कर पाया। दूसरी और तीसरी पसंद के मतों की गणना में भाजपा के पांचवें क्रमांक के उम्मीदवार और कांग्रेस के भाई जगताप विजयी हुए तो कांग्रेस के चंद्रकांत हंडोरे को पराजय स्वीकार करनी पड़ी।
शिवसेना ने उड़ाया जीत का गुलाल
शिवसेना उम्मीदवार सचिन अहिर और आमश्या पडवी की जीत सुनिश्चित  होने के कारण शिवसैनिक शाम से ही विधान भवन परिसर में जुटने लगे थे। आमश्या पाडवी के नंदूरबार से आदिवासी बंधु बड़ी संख्या में आए थे। वहां पहुंचे आदिवासी बहनों और बंधुओं ने ढोल की ताल पर विधान भवन परिसर में नृत्य किया। उसी तरह सचिन अहिर के लिए भी वरली से शिवसैनिक बड़ी संख्या में पहुंचे थे। जीत की घोषणा होते ही ‘कोण आला रे कोण आला, शिवसेनेचा वाघ आला,’ ‘शिवसेना जिंदाबाद’ की घोषणा करते हुए विधान भवन परिसर को गुंजायमान कर दिया। दोनों विजयी उम्मीदवारों की जीत का जुलूस यहां से निकाला गया। इस मौके पर शिवसेना का भगवा झंडा शान से लहरा रहा था।

विधान परिषद का रणसंग्राम! प्रमुख नेताओं की निगरानी में २८५ विधायकों का मतदान

विधान परिषद की १० सीटों के लिए कल विधान भवन में मतदान संपन्न हुआ। ११ उम्मीदवारों वाले इस चुनावी रणसंग्राम में २८५ विधायकों ने मतदान किया। शिवसेना, राकांपा, कांग्रेस और भाजपा सहित सभी चारों दलों के नेता विधान भवन में मौजूद थे और विधायकों को व्यक्तिगत रूप से निर्देशित करके चुनाव के लिए भेजते थे। मतदान की पूरी प्रक्रिया दोपहर करीब ३.४५ बजे पूरी हुई। सुबह ९ बजे मतदान शुरू हुआ। होटल से आनेवाले उम्मीदवारों के मतदान केंद्र पहुंचने तक उनका खास ख्याल रखा गया। पहले पसंदीदा उम्मीदवार और फिर अगले उम्मीदवार की वरीयता दर्ज करने के लिए होटल में मार्गदर्शन करने के बाद विधायकों को एक बार फिर से विधान भवन में मतदान के संबंध में जानकारी देकर फिर मतदान केंद्रों पर भेजा था।

भाजपा कार्यालय में विधायकों का स्कूल
विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस ने विधान भवन में अपने उम्मीदवारों की बैठक की। इस बैठक के बाद भी फडणवीस हर उम्मीदवार से व्यक्तिगत रूप से बात कर वोटिंग के लिए भेज रहे थे। मतदान के बाद भी विधायकों को उनके कार्यालयों में वापस बुलाया जा रहा था।
महाविकास आघाड़ी के एकजुट
विधान भवन में शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस के मतदाताओं में एकजुटता दिखाई दी। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे स्वयं विधान भवन में उपस्थित रहकर वोटिंग प्रक्रिया पर विशेष ध्यान दे रहे थे, इसी तरह पर्यावरण मंत्री आदित्य ठाकरे शिवसेना उम्मीदवारों के साथ बस से विधान भवन पहुंचे और शिवसेना विधायकों का विश्वास बढ़ाया। उन्होंने विधायकों को विधान भवन पहुंचने के बाद भी मत डालने के संदर्भ निर्देश दिए। इसी प्रकार शिवसेना से अनिल परब, एनसीपी से उपमुख्यमंत्री अजीत पवार और कांग्रेस से अशोक चव्हाण को नियुक्त किया गया था, जो विधायकों को मार्गदर्शन कर रहे थे। उपमुख्यमंत्री अजीत पवार, नगर विकास मंत्री एकनाथ शिंदे और जल संसाधन मंत्री जयंत पाटील ने महाविकास आघाड़ी के सभी विधायकों की वोटिंग समाप्त होने के बाद मतदान किया।
सुप्रीम कोर्ट में भी नहीं मिली नवाब मलिक, देशमुख को राहत
महाराष्ट्र के विधान परिषद चुनाव में वोट डालने के लिए अस्थाई रूप से रिहाई देने की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के विधायकों नवाब मलिक और अनिल देशमुख की अर्जी सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी, जिसके कारण कल विधान परिषद के चुनाव में उक्त दोनों विधायक मतदान नहीं कर सके। इससे पहले मुंबई हाई कोर्ट ने दोनों विधायकों की याचिका गत सप्ताह खारिज की थी, जिसके बाद दोनों ने सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई थी। महाराष्ट्र में विधानसभा परिषद चुनाव की वोटिंग शुरू होने से पहले सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस सी.टी. रविकुमार और सुधांशु धूलिया की अवकाश पीठ ने राकांपा विधायकों को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह जनप्रतिनिधि अधिनियम के अनुच्छेद ६२(५) की व्याख्या कर सकता है ताकि यह जाना जा सके कि गिरफ्तार विधायक और सांसद राज्यसभा और विधान परिषद चुनाव में मतदान कर सकते हैं या नहीं। यह अनुच्छेद कैदी को वोटिंग करने की अनुमति नहीं देता है। याचिकाकर्ताओं की वकील मीनाक्षी अरोड़ा ने दलील दी कि अगर विधायकों को वोट नहीं देने दिया गया तो इसका मतलब होगा कि उस पूरे विधानसभा क्षेत्र को वोट नहीं करने दिया गया। विधायक निर्वाचित प्रतिनिधि हैं इसीलिए वे सिर्फ व्यक्ति नहीं होते बल्कि अपने पूरे क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस पर सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले  का उदाहरण देते हुए कहा कि अनुच्छेद ६२(५) का पालन किया जाना चाहिए। सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने कहा कि मसला यह है कि याचिकाकर्ता जेल में है या नहीं। खंडपीठ ने कहा कि अगर याचिकाकर्ता हिरासत में होते तो वोटिंग करने में मनाही नहीं थी लेकिन चूंकि यह मामला मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है तो यहां अनुच्छेद ६२(५) लागू होता है।

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