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सरकारी जमीन को खत्म करने का षड्यंत्र! … पीएपी और धारावी पुनर्विकास परियोजना के खिलाफ मुलुंडकरों का विरोध

७ मार्च से करेंगे `चेन हंगर स्ट्राइक’

संदीप पांडेय / मुंबई
मुलुंड में प्रस्तावित पीएपी और धारावी पुनर्विकास परियोजना का मुलुंडकरों ने कड़ा विरोध किया है। २ मार्च की शाम को मुलुंड- पूर्व के राजे संभाजी सांस्कृतिक केंद्र मैदान में एक सार्वजनिक बैठक का आयोजन किया गया था, जिसमें हजारों की संख्या में मुलुंडकरों ने भाग लिया था। इस अवसर पर एड. राजकुमार अवस्थी, हिरवा संस्था के भरत सोनी, हरिओम नगर एसोसिएशन के अध्यक्ष साहेबराव सुरवाडे और गंगाधर तुलसंकर भी मौजूद रहे।
मुलुंडकरों का कहना है कि इस परियोजना के लिए राज्य सरकार ने अडानी को कॉन्ट्रैक्ट दिया है। इसके लिए ६४ एकड़ जमीन ९९ साल के लिए लीज पर देने के लिए जीआर निकाला गया है। अगर मुलुंड में तीन से चार लाख लोग आएंगे तो मुलुंड का क्या हाल होगा इसलिए मुलुंडकर इस परियोजना के खिलाफ ७ मार्च से केलकर कॉलेज के क्षेत्र में परियोजना कॉलोनी के सामने `चेन हंगर स्ट्राइक’ करेंगे। वे अपने इस भूख हड़ताल को तब तक जारी रखेंगे, जब तक राज्य सरकार अपने इस पैâसले को वापस नहीं ले लेती है।
५ फरवरी को वैâबिनेट बैठक में धारावी प्रोजेक्ट के लिए २८३ एकड़ साल्ट पैन जमीन पारित का प्रस्ताव रखा गया था, जिसमें मुलुंड की जमीन भी शामिल थी। राज्य सरकार ने धारावी परियोजना के लिए एमसीजीएम से मुलुंड में ६४ एकड़ जमीन की मांग की। विधानसभा में दिए गए एक बयान में मुलुंड विधायक ने कहा कि मुलुंड में एक भी वर्ग फुट जमीन धारावी प्रोजेक्ट के लिए नहीं दी गई है, जबकि प्रोजेक्ट का काम शुरू हो गया है।

पर्यावरण का भी ध्यान रखना होगा
हम विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन हमें विकास करते समय स्थानीय लोगों और पर्यावरण का भी ध्यान रखना होगा। मुलुंड में आगामी पीएपी परियोजना में ४०,००० लोगों और धारावी परियोजना में ४ लाख लोगों को स्थानांतरित किया जाएगा। इसमें मुलुंड के बुनियादी ढांचे पर दबाव को ध्यान में नहीं रखा गया। मैं इसके लिए पिछले ४ महीने से लड़ रहा हूं, अब गुरुवार से मैं मुलुंडकरों के साथ अनशन पर बैठूंगा और प्रोजेक्ट रद्द होने तक लड़ाई जारी रहेगी।
-सागर देवरे, अध्यक्ष प्रयास धर्मार्थ संगठन, मुलुंड

विरोध जारी रखेंगे
मुलुंड को मुंबई का ताज कहा जाता है। यहां की शांति और सुंदरता को कुछ कथित लोगों का ग्रहण लग गया है। हम विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन मुलुंड-पूर्व में लाखों की संख्या में जो जनसंख्या बढ़ेगी, उससे बुनियादी सुविधाएं अस्त-व्यस्त हो जाएगी, जिसका सरकार को तनिक भी खयाल नहीं है। यदि विकास करना है तो स्थानीय लोगों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए न कि किसी बिल्डर को फायदा पहुंचाने के लिए मुलुंडकरों का हक मारना चाहिए। हम मुलुंडकर तब तक इसका विरोध जारी रखेंगे, जब तक सरकार नींद से जागकर मुलुंड के इस विनाशकारी पीएपी प्रोजेक्ट को रद्द नहीं करेगी।
– अविनाश पांडेय, मुलुंडकर

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