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महानंद की ३२ एकड़ भूमि गुजरात लॉबी के गले में डालने की साजिश! … संजय राऊत का जोरदार आरोप

सामना संवाददाता / मुंबई
महानंद की २७ एकड़ जमीन और राष्ट्रीय डेयरी विकास महामंडल (एनडीडीबी) को पहले दी गई पांच एकड़ जमीन समेत कुल ३२ एकड़ जमीन गुजरात लॉबी के गले में डालने की साजिश चल रही है। इस तरह का जोरदार आरोप शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) पक्ष के नेता व सांसद संजय राऊत ने कल ‘एक्स’ के माध्यम से सत्ताधारियों पर लगाया।
महानंदा डेयरी हस्तांतरित करने के इस फैसले पर संजय राऊत ने कल सोशल मीडिया ‘एक्स’ के माध्यम से सरकार पर जोरदार हमला किया। महाराष्ट्र राज्य सहकारी दूध महासंघ (महानंद) पर शासन का संचालक मंडल था। सरकार के दुग्ध विकास मंत्री अध्यक्ष थे और दुग्ध विभाग के राज्य मंत्री उपाध्यक्ष थे। उस दौरान आठ लाख लीटर दूध की बिक्री होती थी। यह बहुत ही बढ़िया तरह से चल रहा था। लेकिन दुग्ध विकास मंत्री राधाकृष्ण विखे-पाटील के सगे साले राजेश नामदेवराव परजणे ने जब से महानंद का बतौर अध्यक्ष कामकाज संभाला है, तभी से महानंद का पतन शुरू हो गया। महीने में एक बार आकर महासंघ चला रहे हैं। महासंघ की ओर अनदेखी किए जाने के कारण इसकी पैकिंग बिक्री पूरी तरह से घट गई है। इसका कामगार संगठनों ने भी जवाब मांगा था।
तुकाराम मुंढे के हाथ में दो संचालन महानंद डेयरी को ‘एनडीडीबी’ बोर्ड को सौंपने की बजाय, तुकाराम मुंढे जैसे सख्त अधिकारियों और महाराष्ट्र के दूध व्यवसाय में अनुभव वाले अच्छे निदेशकों को रखकर महानंद को बेहतर ढंग से चलाया जा सकता है। राज्य सरकार ‘एनडीडीबी’ को ३५० करोड़ रुपए देगी। इसके बजाय यदि १२५ करोड़ कर्मचारी वीआरएस के लिए महानंद को दिया तो बहुत अच्छे से चल सकता है और ‘एनडीडीबी’ के कब्जे में जाने से बच सकता है। इससे पहले महानंद पर १५० करोड़ रुपए का बकाया था। पिछले साल अजीत दादा ने दूध पाउडर के ८० करोड़ रुपए सरकार का माफ किया। अब ये सभी पैसे खत्म हो गए हैं। इसलिए महानंद ‘एचडीडीबी’ को देने की चाल है। ये सब चालबाजी अपने साले को खुश करने के लिए की जा रही है। राजेश नामदेवराव परजणे मंत्रालय में बैठकर महानंद का कामकाज देख रहे हैं। विखे-पाटील जवाब दो! संजय राऊत ने ‘एक्स’ के जरिए राधाकृष्ण विखे पाटील से पूछा है कि महाराष्ट्र के महानंद को कौन खरीदने जा रहा है।

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