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मीडिया का गला घोंटने की साजिश …चुनाव पूर्व विरोधी पत्रकारों को करना है खामोश

केंद्र की भाजपा सरकार ने २०२४ के लिए तैयारी शुरू कर दी है। इसका सबसे बड़ा धमाका कल सुबह देखने को मिला। दिल्ली पुलिस के सैकड़ों जवानों ने अचानक कई पत्रकारों के घरों पर छापा मारकर तलाशी ली। कुछ देर बाद खबर आई कि कुछ पत्रकारों को गिरफ्तार कर लिया गया है। जाहिर सी बात है कि मीडिया पर सरकार का यह हमला लोगों को नागवार गुजरा। इसके बाद लोगों ने ट्विटर पर जमकर भड़ास निकाली।
मीडिया व राजनीति के जानकारों का मानना है कि २०२४ में मोदी को किसी भी तरह से फिर से सत्ता पर काबिज होना है। बेरोजगारी व महंगाई का मुद्दा इस समय देश में छाया हुआ है और उसे ये पत्रकार बड़ी गंभीरता से उठा रहे हैं। दरअसल, इस वक्त अधिकांश मीडिया संस्थान वही बोल ओर दिखा रहे हैं, जो मोदी सरकार चाहती है। मोदी सरकार के खिलाफ जाने की किसी में हिम्मत नहीं है। ऐसे में देश में कुछ चुनिंदा पत्रकार बचे हैं, जो विभिन्न पलेटफॉर्मों पर बड़े साहस के साथ अपनी बात रखते हैं। ‘एक्स’ और यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने उन्हें एक ऐसा मंच उपलब्ध करा दिया है जहां ये लोग निर्भीकता से अपनी बात रख सकते हैं। वे वहां पर तमाम तरह के सरकारी घोटाले व नीतियों की पोल खोलते रहते हैं। नोटबंदी, जीएसटी से लेकर मोदी सरकार की तमाम आर्थिक नीतियों की पोल खोलते रहते हैं। बढ़ती बेरोजगारी व महंगाई से देश की जनता किस तरह से परेशान है, ये बताते हैं। बस यही बात मोदी सरकार को नागवार गुजर रही थी। इनकी आवाज को दबाने के लिए मोदी सरकार कितनी बेकरार थी, यह इसी बात से समझा जा सकता है कि उसने पत्रकारों पर यूएपीए जैसी गंभीर आतंकी धाराएं लगा दी हैं। क्या किसी विरोधी पत्रकार को आतंकी साबित किया जा सकता है? पर साहेब के राज में कुछ भी मुमकिन है! पर ये पब्लिक है सब जानती है। २०२४ में सबका हिसाब हो जाएगा, इसमें कोई शक नहीं है!

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