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हनुमान चालीसा की आड़ में षड्यंत्र! … मुख्यमंत्री की लोकप्रियता से परेशान हैं विरोधी

चंद्रकांत दुबे / मीरा रोड  । हनुमान चालीसा तो एक बहाना है, दरअसल इसकी आड़ में सरकार को बदनाम करना ही विरोधियों का षड्यंत्र है। सांसद नवनीत राणा व उनके पति रवि राणा तो एक मोहरा हैं, बाकी सारी चालें भाजपाइयों द्वारा चली जा रही हैं। भला राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के घर ‘मातोश्री’ के बाहर हनुमान चालीसा पढ़ने का कोई औचित्य है क्या? ऐसा सवाल लोगों की तरफ से इन दिनों किया जा रहा है।
गौरतलब हो कि जब से महाविकास आघाड़ी की सरकार महाराष्ट्र में बनी है और राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे बने हैं तभी से भाजपा के सीने पर सांप लोटने लगा, उन्हें बर्दाश्त नहीं हो रहा है। भाजपाई तभी से सरकार को गिराने तथा बदनाम करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं, बल्कि द्वेषपूर्ण हथकंडे अपनाने से भी बाज नहीं आ रहे हैं। जबकि कोरोना जैसी महामारी आने के कुछ ही माह पहले यह सरकार बनी और मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के द्वारा कोरोना की रोकथाम के लिए किए गए कार्यों की सराहना देश में ही नहीं विदेशों में भी की जा चुकी है। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की बढ़ती लोकप्रियता भाजपाइयों को हजम नहीं हो पा रही है और घटिया किस्म की राजनीति हो रही है। इसी मुद्दे पर मीरा-भायंदर के लोगों ने अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं देते हुए भाजपा को जमकर लताड़ लगाई है।

‘अमरावती’ से मुंबई आकर राणा दंपति का हनुमान चालीसा पढ़ना और वह भी ‘मातोश्री’ के बाहर, यह एक सुनियोजित साजिश का ही हिस्सा है, जिसकी स्क्रिप्ट भाजपा के द्वारा लिखी गई है। हिंदू-मुस्लिम समुदाय के भाईचारे में भी जहर घोलने का काम किया जा रहा है, जिसे महाराष्ट्र की जनता को भली-भांति समझना पड़ेगा।
-साजिद आसिफ पटेल, मीरा रोड

राणा दंपति की चाल और भाजपा की साजिश कामयाब नहीं हुई। बहादुर शिवसैनिकों ने दिखा दिया कि उनसे जो टकराएगा, चकनाचूर हो जाएगा। हिंदूहृदयसम्राट शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि सभी देशवासियों के दिलों में बसते हैं। ‘मातोश्री’ घर ही नहीं, बल्कि सभी शिवसैनिकों का देवस्थान भी है। कोई शिवसेना को ललकारेगा तो क्या शिवसैनिक चुप बैठेंगे?
– रामभवन शर्मा, काशीमीरा

भगवान श्रीराम और हनुमानजी सभी हिंदुओं के आराध्य हैं और हम सभी के रग-रग में बसते हैं। ‘सीय राम मय सब जग जानी’ भगवान सब जगह विराजमान हैं। आखिर राणा पति-पत्नी को मुंबई आकर, वह भी चैलेंज करके मातोश्री के बाहर हनुमान चालीसा पढ़ने की क्या जरूरत थी? इस कृत्य में बहुत बड़ी साजिश की बू आ रही है। इसे घटिया दर्जे की राजनीति से ज्यादा कुछ नहीं कहा जा सकता।
– दिनेश नलावड़े, भायंदर

इससे पहले भाजपा ने किसी और को आगे कर हिंदू-मुस्लिम करने की कोशिश की, जिसमें अजान, हनुमान चालीसा जैसे विवाद को लाया गया। इस मुद्दे की हवा निकलते देख वे बौखला गए क्योंकि महाराष्ट्र में लॉ एंड ऑर्डर के आगे किसी की नहीं चलती। दंगा भड़काने में कामयाब नहीं हुए तो धर्म को लाकर राणा दंपति को आमने-सामने की लड़ाई लड़वाने की कोशिश की, जिससे मुंबई की कानून-व्यवस्था बिगड़ जाए, लेकिन मुंह की खानी पड़ी और लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ करनेवाले बंटी-बबली अब सलाखों के पीछे हैं।
शफीक अहमद सुलतानपुरी (समाजसेवी), भायंदर

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