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बुजुर्गों की सेहत पर कब्ज का कब्जा!

८० फीसदी बुजुर्ग हैं शिकार
सप्ताह में अस्पताल पहुंच रहे १५-२० मरीज
धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई
बुजुर्गों में कब्ज, घुटने और पीठ दर्द जैसी स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं। ८० वर्ष से अधिक उम्र के लगभग ८० फीसदी बुजुर्गों की सेहत पर कब्ज का कब्जा हो गया है। आलम यह है कि हर हफ्ते १५-२० मरीज इस बीमारी का इलाज कराने के लिए पहुंच रहे हैं। वहीं चिकित्सकों के अनुसार शारीरिक गतिविधि की कमी, आहार में बदलाव और कुछ दवाएं इसका कारण बन रही हैं। ऐसे में इस समस्या को नजरअंदाज न करते हुए समय पर विशेषज्ञ की सलाह लेना काफी जरूरी है। इसके अलावा जीवनशैली में बदलाव, संतुलित आहार लेना, नियमित व्यायाम करना, जंक फूड से परहेज करना और धूम्रपान से बचना भी जरूरी है।
प्रति सप्ताह तीन बार से कम शौच करना कब्ज है। शौच की आवृत्ति हर व्यक्ति में काफी भिन्न हो सकती है। कुछ लोगों को दिन में कई बार शौच होता है, जबकि कई को सप्ताह में केवल एक या दो बार ही शौच होता है। इसके चेतावनी संकेतों में बार-बार, सूखा या कठोर शौच, पेट में दर्द, सूजन, मतली और शौच के बाद ऐसा महसूस होना जैसे कि पेट खाली नहीं महसूस होना आदि शामिल है। ऐसे लक्षण दिखने पर डॉक्टरी सलाह लेना जरूरी है। ८० वर्ष से अधिक उम्र के नागरिकों में कब्ज होना आम बात है।
कब्ज के मुख्य कारक
लीलावती अस्पताल के गैस्ट्रो एंटेरोलॉजिस्ट डॉ. रुचित पटेल ने कहा कि हर सप्ताह ७० साल से अधिक उम्र के कम से कम ५-६ मरीज कब्ज की शिकायत लेकर ओपीडी में आते हैं। बुढ़ापे में कब्ज के मुख्य जोखिम कारक कम फाइबर वाले आहार का सेवन, शारीरिक गतिविधि में कमी, पेट में दर्द और पेट की मांसपेशियों की कमजोरी, मलाशय की संवेदनशीलता में कमी, पुरानी चिकित्सा स्थितियां जैसे मधुमेह मेलेटस, गुर्दे की विफलता, दर्द निवारक दवाओं का उपयोग हैं।
इन बीमारियों का वाहक कब्ज
जायनोवा शाल्बी अस्पताल के जनरल और लेप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. हेमंत पटेल ने कहा कि बढ़ती उम्र के साथ कब्ज की समस्या बढ़ती जाती है। मुंबई में हर सप्ताह कब्ज के लगभग १५-२० मरीज इलाज के लिए आते हैं। कब्ज न केवल बवासीर, अल्सर, पेट दर्द, गुदा विदर और फिस्टुला जैसी बीमारियों का वाहक है, बल्कि दिल के दौरे और स्ट्रोक का भी कारण बनता है। कब्ज के कारण होने वाला तनाव रक्तचाप में उतार-चढ़ाव का कारण बन सकता है। इससे रक्त संचार में बाधा आ सकती है, जिससे हार्ट अटैक या स्ट्रोक की समस्या हो सकती है। अपोलो स्पेक्ट्रा मुंबई आंतरिक चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. अमित शोभावत ने कहा कि बुजुर्गों में कब्ज की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है।
शौच के लिए दवा का सेवन करते हैं ७५ फीसदी बुजुर्ग
विशेषज्ञों द्वारा किए गए अध्ययनों के अनुसार, वयस्कों में कब्ज की व्यापकता २४ से ५० प्रतिशत तक होती है। ७५ फीसदी बुजुर्ग मरीज प्रतिदिन शौच के लिए दवा का उपयोग करते हैं। डॉ. पटेल ने कहा कि कब्ज को दूर करना और वरिष्ठ नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना समय की मांग है। कब्ज को बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें। डॉक्टर से सलाह लें और उनकी सलाह के अनुसार दवा लें।

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