मुख्यपृष्ठस्तंभउपभोक्ता अपने अधिकारों के प्रति हों जागरूक

उपभोक्ता अपने अधिकारों के प्रति हों जागरूक

राजेश माहेश्वरी।  एक उपभोक्ता जागरूक होकर ही अपने अधिकारों को सुरक्षित रख सकते हैं। इसी मकसद से देश में हर वर्ष २४ दिसंबर को राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस मनाया जाता है। उपभोक्ता को कानूनी तौर पर सशक्त बनाने के लिए उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम देश में लागू है, जिसमें सभी वस्तुओं और सेवाओं तथा ई-कॉमर्स सहित सभी प्रकार के लेन-देन शामिल हैं। इस कानून के अंतर्गत उपभोक्ता विवादों का सरल, त्वरित और किफायती समाधान प्रदान करने के लिए जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग और फोरम नामक त्रिस्तरीय अर्ध-न्यायिक तंत्र स्थापित किया गया है। बावजूद इसके उपभोक्ताओं से धोखाधड़ी के मामले लगातार प्रकाश में आते रहते हैं। उपभोक्ता अदालतों में लगातार बढ़ते मुकदमे इस बात का स्पष्ट प्रमाण हैं।
कानून की जानकारी के अभाव, लालच और प्रलोभन के चलते अक्सर उपभोक्ता ठगा जाता है। कुछ लोग थोड़े से पैसे बचाने के चक्कर में बिल लेने से परहेज करते हैं, जबकि सच्चाई है कि आपके द्वारा लिया बिल खराब प्रोडक्ट से छुटकारा दिला सकता है। दुकानदार अगर सामान वापस नहीं करेगा तो बदलेगा तो जरूर। इस बात का ध्यान रखें कि कच्चे बिल की अपेक्षा प्रिंटेड पक्का बिल लें, क्योंकि पक्का बिल ही उपभोक्ता फोरम में क्लेम में सबूत के तौर पर काम आ सकता है।
एमआरपी यानी मैक्सिमम रिटेल प्राइस यानी वह कीमत, जो किसी पैक्ड सामान पर छापी जाती है। मतलब वह मूल्य, जिससे ज्यादा पर कोई सामान ग्राहक को नहीं बेचा जा सकता है। लेकिन देश के हर छोटे-बड़े शहर में कुछ सामान तो एमआरपी से भी ज्यादा कीमत पर खरीदने पड़ते हैं। देशभर के रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों और ढाबों पर कोल्ड ड्रिंक्स और पानी की बोतलें, नमकीन, बिस्कुट व चिप्स वगैरह के पैकेट एमआरपी के मुकाबले पांच से दस रुपए महंगे बेचे जाते हैं। ग्राहकों के हितों की रक्षा के लिए केंद्र सरकार में उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय है। इसके बावजूद एमआरपी के नाम पर ठगी धड़ल्ले से चल रही है। रेल टिकटों की बड़े पैमाने पर काला बाजारी के अलावा बैंकों में भी बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां हो रही हैं। ब्याज दरों और ईएमआई में हेराफेरी हो रही है।
भारत के डिजिटल होते जाने को देखते हुए उपभोक्ताओं को सशक्त बनाने के लिए सरकार द्वारा कई नई योजनाएं शुरू की गई हैं। बावजूद इसके धोखाधड़ी रुक नहीं रही है। ऑनलाइन शॉपिंग के बारे में हुए एक शोध में पता चला है कि ई-रिटेलर्स द्वारा बेचे जानेवाले ५ उत्पादों में से १ जाली और नकली पाया गया है और सुगंध, सौंदर्य प्रसाधन, खेल के सामान और बैग के मामले में नकली उत्पादों की आशंका सबसे अधिक रहती है।
किसी भी चीज की एक मैन्युपैâक्चरिंग डेट यानी बनने की तारीख होती है और एक्सपाइरी डेट यानी खराब होने की तारीख होती है, जो प्रोडक्ट पर लिखी रहती है। एक्सपाइरी डेट निकलने के बाद अगर आप इसे खरीद रहा हैं तो वह भी गलत है। आप दुकानदार से कहकर इसे तुरंत बदल लें। इसके अलावा प्रोडक्ट की कीमत, सामग्री, मात्रा और इस्तेमाल करने का तरीका अवश्य जांच लें। कंज्यूमर एक्ट यह सारी जानकारी वाला लेबल मुहैया कराने की बात कहता है, इसलिए आप इस लेबल को जांच कर ही खरीददारी करें। दिवाली और धनतेरस पर सोने-चांदी के सिक्के खरीदने की परंपरा है लेकिन इस त्यौहार पर कई लोग खोटे और मिलावटी सिक्के बेचकर ग्राहकों को ठगते हैं।
भारत में जीवन बीमा बेचनेवाले लाखों एजेंट हैं। उनमें से अधिकांश ग्राहकों को उनकी नीतियों और जीवन शैली के लिए उपयुक्त नीतियों का चयन करने में मदद करते हैं, जबकि कुछ ऐसे भी हैं जो तथ्यों को गलत तरीके से पेश करने के साथ बीमा बेचने की कोशिश करते हैं। अंतत, बीमा खरीददारों को ये पता होना चाहिए कि बीमा उन्हें गलत तरीके से बेचा गया है। एजेंट लाभ लेने के लिए पॉलिसीधारक के साथ लागत और कर्तव्यों पर चर्चा नहीं करते।
सरकार लोगों को बाजारी धोखाधड़ी से बचने के लिए कायदे-कानून और इसके प्रति जागरूक करने के लिए कई प्रयास करती हैं लेकिन सरकारों के ये प्रयास निरर्थक हैं, इसके प्रति लोग गंभीर नहीं होते। उपभोक्ताओं विशेषकर ग्रामीण उपभोक्ताओं के शोषण का मुख्य कारण उनका अज्ञान है। उन्हें अपने अधिकारों के बारे में जानकारी होनी चाहिए और साथ ही उनका उपयोग भी करना आना चाहिए, तभी उपभोक्ता संरक्षण आंदोलन वास्तविक अर्थों में सफल हो सकता है। उपभोक्ता आंदोलन को मजबूत करने में स्वैच्छिक उपभोक्ता संगठन और शैक्षणिक संस्थान महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

लेखक उत्तर प्रदेश राज्य मुख्यालय पर मान्यता प्राप्त स्वतंत्र पत्रकार हैं।

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