मुख्यपृष्ठनए समाचारकोरोना नहीं छोड़ रहा गला, गड़बड़ हो रहा फेफड़ा, दिमाग और लीवर!

कोरोना नहीं छोड़ रहा गला, गड़बड़ हो रहा फेफड़ा, दिमाग और लीवर!

-गंभीर बीमारी का शिकार है तीन में से एक मरीज
-शोध में सामने आई जानकारी

सामना संवाददाता / मुंबई

हिंदुस्थान में भले ही कोरोना कंट्रोल में आ गया है, लेकिन यह अन्य देशों में आतंक मचा रखा है। साथ ही ठीक होनेवाले मरीजों में यह अपना छाप छोड़ने से बाज नहीं आ रहा है। इस महामारी से ठीक हुए करीब एक तिहाई लोगों में पांच महीने के बाद गंभीर बीमारियां दिखाई दे रही हैं। इन रोगियों के कई अंगों खासकर फेफड़े, दिमाग और लीवर में गड़बड़ियां नजर आ रही हैं। इसका खुलासा हालिया हुए शोध में हुआ है।
मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (एमआरआई) स्कैन पर आधारित `द लैंसेट रेस्पिरेटरी मेडिसिन’ में प्रकाशित अध्ययन से पता चला है कि कोविड संक्रमण के बाद अस्पताल से छुट्टी पानेवाले मरीजों के फेफड़ों में असामान्यताएं देखी गईं। यह लगभग १४ गुना थीं, वहीं मरीज के दिमाग में यह तीन और गुर्दे से संबंधित असामान्यताएं दो गुना अधिक थीं। एमआरआई से सामने आया कि गंभीर कोविड संक्रमण, उम्र और पुरानी बीमारियों वाले मरीज ज्यादा प्रभावित दिखे। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के रेडक्लिफ मेडिसिन विभाग के डॉ. बेट्टी रमन ने कहा है कि हमें एमआरआई में लगभग तीन में से एक मरीज के अंगों में असामान्यताएं देखने को मिली। यह निष्कर्ष अस्पताल में भर्ती होने के बाद ५०० कोविड रोगियों की एमआरआई के बाद सामने आया। यह शोध कोरोना के २५९ मरीजों पर किया गया, जिसमें से ५२ मरीजों को खास निगरानी पर रखा गया।
रखी गई खास निगरानी
यूके में १३ स्थानों पर भर्ती किए गए मरीजों को अस्पताल से छुट्टी मिलने के औसतन पांच महीने बाद हृदय, मस्तिष्क, फेफड़े, लीवर और किडनी को कवर करनेवाले एमआरआई स्कैन से गुजरना पड़ा। उनका रक्त परीक्षण भी हुआ। फेफड़ों की एमआरआई में असामान्यताओं के साथ सीने में जकड़न और खांसी के लक्षण सीधे विकारों से जुड़े नहीं हो सकते। पूर्व कोविड मरीजों में दिल और लीवर के नुकसान का स्तर खास निगरानी में रखे गए मरीजों का समान था। शोध में इस बात की भी पुष्टि की गई कि अस्पताल में भर्ती होनेवाले कोविड से ठीक हुए मरीजों में असामान्यताएं पाई गईं। एमआरआई में मरीजों के दो से अधिक अंग प्रभावित थे।
कभी भी आ सकती है कोरोना से २० गुनी बड़ी बीमारी
दुनियाभर में एक बड़ी बीमारी को लेकर विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि नई डिसीज एक्स से ५ करोड़ लोगों की मौत हो सकती है। ये नई बीमारी कोविड महामारी की तुलना में २० गुना अधिक बड़ी बीमारी है। डब्ल्यूएचओ के प्रमुख डॉ. टेड्रोस अदनोम घेब्रेयसस ने कहा है कि यह डिसीज एक्‍स कभी भी आ सकती है और इससे महामारी की आशंका है, जिसमें लाखों लोगों की मौत होगी। इससे बचने के लिए वैज्ञानिक वैक्‍सीन बनाने पर काम कर रहे हैं। डब्ल्यूएचओ ने कहा कि कोरोना महामारी से करीब २५ लाख मौतों का अनुमान है, लेकिन यह नई बीमारी उससे कहीं अधिक घातक है और इसके कारण करीब ५ करोड़ लोगों की मौत होने की आशंका है। ग्‍लोबल हेल्‍थ एक्‍सपर्ट्स ने नई बीमारी को लेकर कहा है कि ऐसा डर है कि डिसीज एक्‍स के कारण स्‍पैनिश फ्लू जैसी तबाही न आ जाए। १९१८-१९२० में स्‍‍‍‍‍‍‍‍पैनिश फ्लू के कारण दुनियाभर में ५ करोड़ से अधिक लोगों की मौत हो गई थी।

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