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नेजल ड्रॉप से होगा कोरोना का खात्मा!

सामना संवाददाता / मुंबई
कोरोना महामारी के खिलाफ हिंदुस्थान को एक और सफलता मिली है। अब इंजेक्शन नहीं, बल्कि वैक्सीन ड्रॉप से नाक में डाली जाएगी। दूसरी तरफ ट्रायल में असरदार साबित होने के बाद देश की पहली नेजल वैक्सीन को आपातकालीन इस्तेमाल के लिए डीसीजीआई की मंजूरी मिल गई है। वहीं भारत बायोटेक द्वारा कोरोना के लिए बनाई गई देश की यह पहली नेजल वैक्सीन है।
उल्लेखनीय है कि ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने इसी साल जनवरी में भारत बायोटेक को इस वैक्सीन के तीसरे फेज का ट्रायल करने की अनुमति दी थी। इसके फेज -१ और फेज -२ के ट्रायल पहले ही पूरे हो चुके हैं। इस वैक्सीन को भारत बायोटेक और वाशिंगटन यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिसन मिलकर बना रही है। नाक से दी जानेवाली इस वैक्सीन को अभी बीबीवी१५४ नाम दिया गया है। सितंबर २०२० में कंपनी ने दावा किया था कि २०२२ में इस नेजल वैक्सीन के १०० करोड़ डोज का प्रोडक्शन कर दिया जाएगा।
वैक्सीन की यह है खासियत
इस वैक्सीन की सबसे बड़ी खासियत ये है कि यह एक नेजल वैक्सीन है, जिसे नाक के जरिए दिया जाएगा। हिंदुस्थान में अभी जितनी वैक्सीन को मंजूरी मिली है, वो सभी इंट्रामस्कुलर हैं, जिसमें बांह में इंजेक्शन के जरिए दवा शरीर में डाली जाती है। नेजल वैक्सीन में इंजेक्शन का इस्तेमाल नहीं होगा। इसे ड्रॉप के जरिए नाक में डाला जाएगा। नेजल वैक्सीन को मस्कुलर वैक्सीन से ज्यादा असरदार माना जाता है। उसकी वजह ये है कि मस्कुलर वैक्सीन जब दी जाती है तो वो फै फेफड़ों को संक्रमण से बचाती है, जबकि नेजल वैक्सीन नाक में ही वायरस के खिलाफ इम्युनिटी बना देती है, जिससे वायरस शरीर के अंदर नहीं जा पाता। कोरोना समेत ज्यादा वायरस म्युकोसा के जरिए शरीर में जाते हैं। म्युकोसा नाक, फेफड़ों और पाचन तंत्र में पाया जानेवाला चिपचिपा पदार्थ होता है। नेजल वैक्सीन सीधे म्युकोसा में ही इम्युन रिस्पॉन्स पैदा करती है, जबकि मस्कुलर वैक्सीन ऐसा नहीं कर पाती।
कब तक आएगी वैक्सीन
भारत बायोटेक का कहना है कि इस वैक्सीन को डिलिवर करना और बनाना मस्कुलर वैक्सीन की तुलना में ज्यादा आसान है। इसे २ से ८ डिग्री सेल्सियस के तापमान में स्टोर करके रखा जा सकता है। इस वैक्सीन को अभी तक इस्तेमाल की मंजूरी नहीं मिली है। हालांकि, कंपनी ने प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए तैयारी कर रखी है। कंपनी का कहना है कि गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र और तेलंगाना समेत कई राज्यों में मैन्युफैक्चिंरग प्लांट बना दिए गए हैं।
दो तरह से हुए हैं ट्रायल
भारत बायोटेक ने इस नेजल वैक्सीन का ट्रायल दो तरह से किया है। पहला ट्रायल देश भर में १४ स्थानों पर १८ से ६० आयु वर्ग में शामिल ३,१०० लोगों पर किया गया था। इसमें इन लोगों को वैक्सीन की दो डोज दी गई थी। इसी तरह दूसरा ट्रायल बूस्टर डोज के रूप में देश भर में नौ जगहों पर ८७५ लोगों पर किया गया था। इसमें उन लोगों को शामिल किया गया था, जिन्होंने पहले दो डोज ले लिए थे। तीसरे फेज के ट्रायल पूरे हो गए हैं और वैक्सीन असरदार रही है। भारत बायोटेक का दावा है कि ट्रायल में ये वैक्सीन कोरोना के खिलाफ असरदार साबित हुई है। कंपनी के मुताबिक इस वैक्सीन से लोगों के अपर रेस्पिरेटरी सिस्टम में कोरोना के खिलाफ जबरदस्त इम्युनिटी बनी है, जिससे संक्रमण होने और फैलने का खतरा काफी कम है। कंपनी का कहना है कि ट्रायल डेटा को अप्रूवल के लिए नेशनल रेगुलेटरी अथॉरिटी को भेज दिया गया है।

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