मुख्यपृष्ठनमस्ते सामना`आंखों पर पट्टी बांधकर बनाईं अनगिनत गणेश मूर्तियां!' : रमा बेन

`आंखों पर पट्टी बांधकर बनाईं अनगिनत गणेश मूर्तियां!’ : रमा बेन

वैसे तो ३१ अगस्त, २०२२ को गणेश चतुर्थी का त्योहार मनाया जानेवाला है। लेकिन महीनों पहले शिल्पकार भगवान गणेश की मूर्तियों को गढ़ने में जुट जाते हैं। गणेश की मूर्तियों को गढ़नेवाले ये कलाकार मूर्तियों में ऐसा रंग भरते हैं कि ये मूर्तियां सजीव हो उठती हैं। ऐसी ही एक शिल्पकार हैं रमा बेन, जो खुली आंखों से नहीं, बल्कि आंखों पर पट्टी बांधकर सन् २००० से गणेश मूर्तियां बना रही हैं। पेश है, रमा बेन से पूजा सामंत की हुई बातचीत के प्रमुख अंश-

  • गणेश मूर्तियों को बनाने की विधा आपने कहां से सीखी?
    पता नहीं, लोग मेरी बात पर यकीन करेंगे अथवा नहीं। सन् २००० में भगवान गणेश मेरे सपने में आए और उन्होंने मुझसे कहा, ‘मेरी मूर्तियों को तुम अपने हाथों से बनाओ। मेरा आशीर्वाद तुम्हारे साथ है।’ सुबह उठने के बाद घरवालों को मैंने ये बात बताई। मैंने उनसे कहा कि मैं मूर्तियां कैसे बना सकती हूं, मुझे मूर्ति बनाना नहीं आता? लेकिन उन्होंने कहा कि अगर तुम्हारे मन में श्रद्धा होगी तो मूर्ति बनाने में तुम्हें कोई दिक्कत नहीं आएगी। उनके कहने पर मैंने अगले मंगलवार को श्रीगणेश किया और दो घंटे में मूर्ति बन गई। इसके बाद पीछे मुड़कर मुझे देखने का वक्त ही नहीं मिला।
  • अब तक आपने कितने गणपति बनाए हैं?
    मेरे परिवार सहित मेरी गणपति पर बेहद आस्था है। भगवान गणेश मेरी प्रेरणा हैं। अब तक मैंने साढ़े पांच लाख से ज्यादा मूर्तियां बनाई हैं। हर मूर्ति का आकार-प्रकार भिन्न रंगों और बनावट वाला है। ये मूर्तियां वॉशेबल और अनब्रेकेबल हैं। ०.२ सेमी से २५ सेमी तक मैंने बाप्पा की मूर्तियां बनाई हैं।
  • क्या आपने मूर्ति बनाने की ट्रेनिंग ली है?
    ये पुण्य से मिलनेवाली सिद्धि है। मेरी सासू मां को ब्लड कैंसर हुआ था। मुंबई के नामी डॉ. अग्रवाल ने बताया कि वे बहुत कम दिनों की साथी हैं। अत: अस्पताल की बजाय हमने उन्हें घर में ही रखा और प्यार से मैंने उनकी देखभाल की। कुछ दिनों बाद उनमें आए बदलाव को देखकर डॉक्टर हैरान हो गए। लेकिन ९ वर्षों की सेवा के बाद सासू मां चल बसीं। मुझे अपने सास-ससुर की सेवा करने का पुण्य मिला और इसी के चलते मूर्ति बनाने की कला मुझमें अपने आप आ गई।
  •  क्या आप मूर्ति बनाने की ट्रेनिंग भी देती हैं?
    अक्सर अनाथ बच्चे कुछ हुनर सीखकर अपनी रोजी-रोटी चलाना चाहते हैं। समाज के ऐसे कई बच्चे हैं, जिन्हें कला सीखनी है परंतु फीस भरने के लिए उनके पास पैसे नहीं होते। ऐसे में मैं ये जिम्मेदारी लेती हूं और बच्चों को मूर्ति कैसे बनाई जाती है, ये सिखाती हूं। मैंने आज तक कई बच्चों को आर्ट एंड ड्राइंग के साथ ही गणेश मेकिंग की कला सिखाई है।
  •  आंखों पर पट्टी बांधकर गणपति बनाने के पीछे क्या लॉजिक है?
    देश की जानी-मानी न्यूज एजेंसी को मेरे घर पर गणपति बनाने के पीछे संदेह था। वे अपनी पूरी टीम के साथ मेरे घर आए और कहा कि आप गणपति बनाती हैं तो हमारे सामने बनाकर दिखाएं। मुझे यह बात बड़ी अजीब लगी। मैंने कहा मैं आंखों पर पट्टी बांधकर भी भगवान गणेश की मूर्ति बना सकती हूं और उसी दिन से मैंने आंखों पर पट्टी बांधकर गणेश मूर्ति बनाना शुरू किया। फिर ये सिलसिला आगे बढ़ता ही गया। गणेश मूर्ति कला बनाने की जो विरासत मुझे मिली है, मैं उसे संभालकर रखना चाहती हूं। समाज के जरूरतमंदों को मैं कुछ कला सीखा सकूं तो मेरा जन्म सार्थक होगा।
  • इस कला में क्या आपके सामने कभी कोई चुनौती भी आई?
    सादगी से गणपति बनाना मुझे अच्छा लगता है। एक मर्तबा मेरे घर में गणपति बनाने के लिए पैसे नहीं थे। पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते लगा कि मैं इस वर्ष गणेश मूर्तियां नहीं बना पाऊंगी। लेकिन घर के मंदिर में रखी पेटी से निकले पैसों से मैंने गणेश जी की सौ मूर्तियां बनाईं। ये एक चमत्कार ही था, जिसे मैं केवल गणेश जी की आस्था और भक्तिभाव के कारण ही पूरा कर पाई। इन गणेश मूर्तियों को बनाने के पीछे मेरी बस यही कामना है कि संसार से अमंगल दूर हो और दुखों का विनाश हो!

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