मुख्यपृष्ठनए समाचारजांच के कारोबार पर नकेल! सरकारी अस्पताल ने निकाला तोड़

जांच के कारोबार पर नकेल! सरकारी अस्पताल ने निकाला तोड़

  • निजी लैब से खत्म होगा गठजोड़

धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई
डॉक्टरों और कर्मचारियों की मिलीभगत से फल-फूल रहे अवैध जांच कारोबार पर अस्पताल नकेल कसने जा रहा है। इस कारोबार को खत्म करने के लिए भायखला स्थित सर जेजे अस्पताल प्रशासन ने तोड़ निकाल लिया है। निजी लैबों से डॉक्टरों और कर्मचारियों के गठजोड़ को खत्म करने के लिए अस्पताल में सुरक्षा बढ़ाने के साथ ही सैकड़ों की संख्या में जगह-जगह लगे सीसीटीवी कैमरों से नजर रखी जा रही है। बता दें कि अस्पताल में भर्ती मरीजों को नियमित खून की जांच के लिए निजी लैबों में भेजे जाने का गोरखधंधा चल रहा था। इसे गंभीरता से लेते हुए डीन डॉ. पल्लवी सापले ने यहां की सुरक्षा बढ़ा दी है। इसके साथ ही कैजुअल्टी डिपार्टमेंट गेट पर अतिरिक्त सीसीटीवी लगाने के आदेश दिए हैं। यहां से बड़ी संख्या में ब्लड सैंपल लिए जा रहे थे।
उल्लेखनीय है कि ४३ एकड़ में फैले सर जेजे अस्पताल में हर दिन २,००० से अधिक मरीज आते हैं। साथ ही लगभग १,००० भर्ती मरीजों का इलाज किया जाता है। अस्पताल की डीन डॉ. पल्लवी सापले ने कहा कि अप्रैल में पदभार संभालते ही निजी लैब कर्मचारियों के अस्पताल में खुलेआम घूमने और मरीजों के ब्लड सैंपल जांच के लिए लेने की शिकायतें मिलने लगीं। इसके बाद इसे गंभीरता से लिया गया और कार्रवाई तेज कर दी गई। उन्होंने कहा कि पहले अस्पताल परिसर में बाहरी चिकित्सा एजेंसियों और पैथोलॉजी लैब की अनुमति नहीं है, ऐसे चेतावनी भरे शब्दों वाले स्टिकर लगाए गए थे।
जांच में मिली कई खामियां
जांच के दौरान तथ्य सहित कुछ खामियां मिलीं, जिसमें पाया गया कि ब्लड सैंपल का आदान-प्रदान कैजुअल्टी गेट से किया जा रहा था। यहां सीसीटीवी न होने का लाभ लैब के कर्मचारी उठा रहे थे। फिलहाल यहां सीसीटीवी लगाए जा चुके हैं। इसके साथ ही निजी लैब या ब्लड सैंपल लेकर बाहर जाने वाले मरीजों के रिश्तेदारों के प्रवेश और निकास को रोकने को लेकर निगरानी बढ़ा दी गई है। इतना ही नहीं समिति की सिफारिश के अनुसार आमतौर पर सुबह के समय ब्लड सैंपल एकत्र किए जाएंगे, जिसकी ऑन ड्यूटी रेजिडेंट डॉक्टरों और नर्सों द्वारा समीक्षा की जाएगी। इतना ही नहीं आरएमओ सुबह वार्डों का चक्कर लगाएंगे। यह पहल नियमित शिकायतों को कम करने में सहायक साबित होगी।
आपात स्थिति में बाहर जाएंगे ब्लड सैंपल
डॉ. सापले ने कहा कि किसी समय यदि कोई मशीन काम नहीं कर रही है तो ऐसी स्थिति में डॉक्टर को खून के नमूने बाहर जांच के लिए भेजने पड़ सकते हैं। ये आपात स्थिति में हो सकती हैं। इसके अलावा आनुवंशिक परीक्षण जैसे कुछ विशेष परीक्षण भी होते हैं, जो अस्पताल में उपलब्ध नहीं होते हैं। उनकी जांच भी बाहरी लैबों में कराए जाएंगे।
तीन शिफ्टों में काम करेंगे सुरक्षाकर्मी
डीन डॉ. सापले ने अस्पताल के अंदर सुरक्षा भी कड़ी कर दी है। सुरक्षा कर्मचारी अब तीन शिफ्टों में चक्कर लगाएंगे। इतना ही नहीं अस्पताल के सभी डॉक्टरों, नर्सों, तृतीय श्रेणी और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को अनिवार्य रूप से अपना पहचान पत्र पहनना होगा। इसके अलावा मरीज के परिजनों के लिए भी पहचान पत्र बनाए जा रहे हैं। इससे वॉर्डों में आने वाले संदिग्ध लोगों के प्रति अधिक सतर्क रहने में मदद मिलेगी। बता दें कि अस्पताल में ५००-६०० सीसीटीवी वैâमरे लगे हुए हैं।
सभी विभाग प्रमुखों की हुई बैठक
डीन डॉ. सापले ने सभी विभाग प्रमुखों के साथ बैठक की। साथ ही सर्वुâलर भेजकर यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि किसी भी मरीज को निजी लैबों में परीक्षण करने के लिए नहीं कहा गया। इसी बीच उन्हें फिर से शिकायत मिली कि अस्पताल में भर्ती मरीज के ब्लड सैंपल का परीक्षण करने के लिए भेजा गया है। इसे गंभीरता से लेते हुए डॉ. सापले ने पैथोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. शुभांगी आगड़े के नेतृत्व में तीन सदस्यीय समिति का गठन किया।

अन्य समाचार