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सोशल मीडिया से रिश्तों में आ रहीं दरारें … जीवन को बना रहा ‘नर्क’!

• राज आसानी से खुल जाने से जोड़ों में बढ़ रहा विवाद

सामना संवाददाता / ठाणे
सोशल मीडिया के जहां फायदे हैं तो वहीं इसके दुरुपयोग भी सामने आ रहे हैं। सोशल मीडिया जहां पुराने रिश्तों को जोड़ता है, तो वहीं नए रिश्तों को खत्म कर जिंदगी को नर्क बना रहा है। लोग जिस तरह से सोशल मीडिया के आदी हो रहे हैं, उससे लोगों के वैवाहिक जीवन में दरारें पड़ने लगी हैं। कई हंसते-खेलते परिवार सोशल मीडिया के कारण टूटने के कगार पर पहुंच चुके हैं। अब तो सोशल साइट से रिश्ते बिगड़ने के कारण कई मामले थानों तक भी पहुंचने लगे हैं। मनोवैज्ञानिक भी मानते हैं कि सोशल साइट्स के ज्यादा इस्तेमाल से विवाहित दंपति की लाइफ पूरी तरह प्रभावित हो रही है। सोशल मीडिया के कारण होने वाले पारिवारिक विवादों की संख्या प्रतिवर्ष बढ़ती जा रही है।
रिश्तों में बढ़ाता शक
बता दें कि पहले जब मोबाइल और सोशल मीडिया नहीं था तो पति-पत्नी के बीच बहस कम होती थी, क्योंकि अगर कोई राज होता भी था तो उसे उजागर करना मुश्किल होता था। लेकिन मोबाइल और सोशल मीडिया ने किसी से भी संपर्क करना आसान बना दिया है। इसके अलावा मोबाइल और सोशल मीडिया के जरिए विवाहेतर संबंधों के बारे में पत्नी या पति को पकड़ना बहुत आसान हो गया है। व्हॉट्सऐप, इंस्टाग्राम, फेसबुक, मैसेज, कॉल आदि के जरिए चैटिंग या बातचीत से पति-पत्नी के बीच शक की दरारें बढ़ रही हैं।

३५३ जोड़ों के विवाद समाप्त
महिला सहायता केंद्र या भरोसा सेल पति-पत्नी और परिवारों के बीच विभिन्न कारणों से होने वाले विवादों और अनबन को सुलझाने का प्रयास करने को प्राथमिकता देता है।
पति-पत्नी के बीच की गलतफहमियां विवाद की जड़ ढूंढने से दूर हो जाती हैं। उनके बीच शुरू विवाद समाप्त हो जाता है। जोड़ों की काउंसलिंग की जाती है। पुलिस के प्रयासों को अच्छी सफलता भी मिल रही है।
सात माह में ७३० शिकायतों में से ३५३ मामलों का निपटारा कर पति-पत्नी की गृहस्थी फिर बसाई गई।

क्या कहती है पुलिस? पुलिस का कहना है कि वॉट्सऐप, इंस्टाग्राम, फेसबुक, मैसेज या कॉलिंग के जरिए दूसरे पुरुष और महिलाओं से चैटिंग और बातचीत अगर संदिग्ध लगती है तो जाहिर तौर पर पार्टनर पर शक होता है। एक बार मन में संदेह हो जाए तो रिश्तों में उसका बुरा प्रभाव पड़ता है। पुलिस के मुताबिक, पति-पत्नी के बीच होने वाले ९० फीसदी शक और झगड़े के लिए मोबाइल और सोशल मीडिया जिम्मेदार है।

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