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तनाव बना दिल का दुश्मन

-चपेट में युवा…हर पांचवा मरीज ३० साल से कम

सामना संवाददाता / नई दिल्ली

दिल हमारे शरीर का अति महत्वपूर्ण अंग है। देश में लगातार दिल की बीमारी बढ़ते ही जा रही है। इससे कम उम्र के युवा भी अब अकाल मौत का शिकार हो रहे हैं। महज २५ से ३० साल के उम्र वाले युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। ताजा मामलों में हर पांच में से एक मरीज की उम्र ३० साल से कम होती है। आज से कुछ साल पहले ४० साल के मरीज को दिल का दौरा पड़ना बहुत ही दुर्लभ माना जाता था, लेकिन अब इसमें हैरानी वाली कोई बात नहीं जान पड़ती है। डॉक्टरों की मानें तो दिल की बीमारी की मुख्य वजह युवाओं की गलत लाइफस्टाइल, ज्यादा टेंशन, अनहेल्दी खानपान, स्मोकिंग, पॉल्यूशन, कोलेस्ट्रॉल, ब्लड प्रेशर की समस्या और मोटापा है। यह दिल की सेहत को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है। लिहाजा, इससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ रहा है। `न्यूयॉर्क टाइम्स’ का एक लेख बताता है कि दिल का सबसे बुरा दुश्मन तनाव है। इस बात की संभावना है कि कोविड महामारी के बाद उत्पन्न स्थिति जैसे कि नौकरी चले जाना और वित्तीय मुश्किलों से बना मनोवैज्ञानिक तनाव एक वजह है। देखा गया है कि जिन लोगों में अपनी नौकरी चले जाने का भय है, उनमें दिल का दौरा पड़ने की संभावना लगभग २० फीसदी बढ़ जाती है। कोरोना के बाद युवाओं में हार्ट अटैक के ज्यादा केस आ रहे हैं।
गौरतलब है कि हिंदुस्थान में कुल हृदयाघात में लगभग २० फीसदी मामले ४० साल से कम उम्र वालों के हैं, जबकि पश्चिमी जगत में यह वर्ग ५ प्रतिशत है। अचानक मृत्यु का सबसे आम कारण है माइयोकार्डियल इन्प्रâक्शन/हार्ट अटैक। युवाओं में हृदयाघात के लिए धूम्रपान सबसे अधिक जोखिम पैदा करने वाला माना जाता है। अत्यधिक व्यस्तता भरी कार्यशैली, टारगेट पूरा करने के दबाव या नौकरी असुरक्षित होना तनाव पैदा करता है।

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