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मुंबई पर संकट : डेंगू-मलेरिया का खतरा बढ़ा! 

मुंबईकर रहें सावधान
सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई में इस महीने रिमझिम बारिश होती रही। ऐसे में मुंबईकरों ने कभी गर्मी तो कभी ठंड का अनुभव किया। फिलहाल, मौसम का यह मिजाज मानसूनी बीमारियों के लिए अनुकूल बन गया है, जिससे लोग बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। आलम यह रहा कि अगस्त में डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, स्वाइन फ्लू और लेप्टो जैसी बीमारियां तेजी से पैâली हैं। मुंबई में पैâलती बीमारियों ने मनपा के लिए परेशानी बढ़ा दी है। साथ ही मनपा ने मुंबईकरों से सावधान रहने की अपील भी की है, ताकि बीमारियों के तुफान को कंट्रोल किया जा सके।
मुंबई मनपा के स्वास्थ्य विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के मुताबिक, एक अगस्त से २७ अगस्त के बीच मलेरिया के ९५९, डेंगू के ७४२, स्टमक फ्लू के ८१९, लेप्टो के २६५, स्वाइन फ्लू के १०८, चिकनगुनिया के ३४ और हेपेटाइटिस के ७७ मामले दर्ज किए गए हैं। मनपा की कार्यकारी स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. दक्षा शाह ने बताया है कि अगस्त में डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया और स्वाइन फ्लू के मामले बढ़े हैं। उन्होंने कहा कि रिपोर्टिंग यूनिट की संख्या बढ़कर ८८० होने से स्क्रीनिंग और ट्रेसिंग अधिक होने लगे हैं। इसके चलते मरीजों की संख्या अधिक दर्ज की जा रही है।
पानी की हुई जांच
जल-जनित बीमारियों के लिए घर-घर सर्वेक्षण के तहत परीक्षण के लिए पानी के २,३७९ नमूने लेकर उनकी जांच की गई। साथ ही पानी में घातक कीटाणुओं का नाश करने के लिए २०,२३० क्लोरीन टैबलेट वितरित किए गए हैं। इसके अलावा स्टमक फ्लू से पीड़ित मरीजों को २०,४५६ ओआरएस उपलब्ध कराया गया।

घर-घर सर्वे कर रहे स्वास्थ्यकर्मी
मनपा स्वास्थ विभाग के मुताबिक, स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर सर्वे कर रहे हैं। बताया गया है कि इस महीने १६,८८,७२० घरों और ७४,६३,९४१ लोगों का सर्वे किया गया है। साथ ही १,५४,०४८ खून के नमूनों को संकलित किया गया। इसके अलावा लेप्टो से पीड़ित कुल १३,६३० मरीजों का इलाज किया गया है। डॉ. दक्षा शाह ने बताया कि डेंगू और मलेरिया की रोकथाम के लिए १४,९५,४२८ इमारतों और झोपड़ों के साथ ही १६,३५,५६७ मच्छरों के प्रजनन स्थलों का निरीक्षण किया गया। इस बीच २४,५१२ प्रजनन स्रोतों का पता चला है, जिसे नष्ट कर दिया गया। इतना ही नहीं २५,४३९ फिलिंग मशीन की सहायता से १०,५१,२६२ इमारतों और झोपड़पट्टियों में धुएं मारे गए। इसके साथ ही लेप्टो की रोकथाम के लिए जहरीली दवाइयों का इस्तेमाल करके ३,७६९ चूहों को मारा दिया गया, साथ ही ४,२४० चूहों को पिंजरे के इस्तेमाल से पकड़ा गया।

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